पंचायत की दबंगई — प्यार की सजा, जबरन सेहरा!
दैनिक स्टेट डेस्क । जमशेदपुर
जब मोहब्बत को अपराध मान लिया जाए और गाँव की पंचायत खुद को कानून समझने लगे — तो ऐसी ही घटनाएं जन्म लेती हैं। पुरानी सरजमदा गाँव में रविवार की शाम एक प्रेमी जोड़े की मुलाकात उस वक्त ‘गुनाह’ बन गई जब युवती सोनिया करुआ के परिजनों को भनक लग गई कि वह युवक संजीद बारी के साथ बाहर गई थी।बस फिर क्या था — गाँव के माझी बाबा की अगुवाई में ग्रामसभा बुला ली गई। न कोई नोटिस, न कोई सुनवाई, बस एकतरफा फैसला — “दोनों की शादी करो और युवती को युवक के घर में रखो।” पीड़ित युवक संजीद बारी का आरोप है कि उसने इस फैसले का विरोध किया, लेकिन ग्रामीणों ने उसके साथ मारपीट की और जबरन उसके हाथों से युवती की मांग में सिंदूर भरवाया।
पुलिस बनी ‘बंधक’ — बोनट पर बैठे दबंग, वर्दी की इज्जत तार-तार! देश में पुलिस की वर्दी का रुतबा और उसका सम्मान — यह सोचकर ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं। लेकिन जमशेदपुर के पुरानी सरजमदा में रविवार को वर्दी की इज्जत को उस वक्त खुलेआम चुनौती दी गई जब परसुडीह थाने की पुलिस युवक-युवती को पूछताछ के लिए थाने ले जाने पहुंची। ग्रामीणों और माझी बाबा ने पुलिस कार्रवाई का जमकर विरोध शुरू कर दिया। नौबत धक्का-मुक्की और तीखी बहस तक पहुंच गई। जब पुलिस ने दोनों को वाहन में बिठाकर रवाना होने की कोशिश की तो भड़के ग्रामीणों ने पुलिस वाहन को चारों ओर से घेर लिया। उससे भी कम न पड़े — कुछ उपद्रवी युवक सीधे पुलिस वाहन के बोनट पर जा बैठे और रास्ता जाम कर दिया।
यह दृश्य किसी फिल्मी सीन से कम नहीं था, लेकिन हकीकत बेहद गंभीर थी। स्थिति को भाँपते हुए डीएसपी सुमित कुमार अतिरिक्त पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। परसुडीह और सुंदरनगर थाने की संयुक्त टीम ने मिलकर हालात पर काबू पाया। पुलिस के साथ दुर्व्यवहार करने वाले कई महिला व पुरुषों को हिरासत में लिया गया। पुलिस अधिकारियों पर हमला और सरकारी कार्य में बाधा डालना IPC की धारा 353 के तहत गंभीर संज्ञेय अपराध है — अब देखना यह है कि इन दबंगों पर कानून की गाज गिरती है या नहीं।
दो बयान, दो सच — युवती बोली ‘दिल दिया’, युवक बोला ‘धोखा मिला’!
इस पूरे मामले का सबसे उलझा हुआ पहलू है — दो अलग-अलग बयान, दो अलग-अलग सच। एक तरफ युवती सोनिया करुआ का कहना है कि वह पिछले चार महीनों से संजीद बारी के संपर्क में थी, दोनों के बीच प्रेम संबंध हैं और वह अपनी मर्जी से उसके साथ रहना चाहती है। दूसरी तरफ युवक संजीद बारी ने प्रेम संबंध से पूरी तरह इनकार करते हुए कहा कि उसे जबरन इस विवाह में धकेला गया।
“मैं उससे प्यार करती हूँ, मेरी मर्जी से शादी हुई है।” — सोनिया करुआ, युवती
यह बयानों का टकराव ही पुलिस के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। कानूनी जानकारों के अनुसार यदि युवक का बयान सही है तो यह जबरन विवाह और शारीरिक प्रताड़ना का मामला बनता है। वहीं यदि युवती की बात सच है तो परिजनों और ग्रामसभा द्वारा उनके रिश्ते को ‘गुनाह’ ठहराना उनके मौलिक अधिकारों का हनन है।
परसुडीह पुलिस ने कहा है कि जांच पूरी होने के बाद ही कानूनी कार्रवाई की जाएगी। दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। इस मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या झारखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में युवाओं को अपनी जिंदगी के फैसले खुद लेने का अधिकार है — या वे आज भी गाँव की पंचायत के ‘फरमान’ के मोहताज हैं?

