पाकुड़ में एक साल से चल रहा था अवैध पत्थर क्रशर का खेल — प्रशासन की नाक के नीचे 200 टीपीएच का प्लांट, तीनों निदेशकों पर केस दर्ज
पाकुड़ जिले के मालपहाड़ी रेलवे साइडिंग क्षेत्र में फैक्ट्री इंस्पेक्टर विनीत कुमार सिंह के नेतृत्व में की गई छापेमारी में एक बड़ी साजिश का पर्दाफाश हुआ है। ‘अर्जुना प्रोजेक्ट्स’ नामक इस कंपनी का 200 टीपीएच (टन प्रति घंटा) क्षमता वाला विशाल पत्थर क्रशर पिछले एक साल से बिना किसी पंजीकरण और लाइसेंस के अवैध रूप से संचालित हो रहा था।जांच में सामने आया कि प्लांट में कोन क्रशर, जॉ क्रशर, स्क्रीनिंग मशीन, 680 एचपी की मोटर और 690 केवीए का भारी जनरेटर लगा हुआ था — जो दर्शाता है कि यह कोई छोटा-मोटा कारोबार नहीं, बल्कि एक संगठित नेटवर्क का हिस्सा था।फैक्ट्री इंस्पेक्टर के मुताबिक, इस प्लांट को अगर लीगली चलाना होता तो लाखों रुपये की लाइसेंस फीस, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से मंजूरी, खनन विभाग से एनओसी और फैक्ट्री एक्ट के तहत रजिस्ट्रेशन जरूरी होता — ये सारी प्रक्रियाएं दरकिनार कर अवैध रूप से उत्पादन किया जा रहा था।
30-35 मजदूर बिना सुरक्षा उपकरणों के कर रहे थे काम — प्रदूषण मानकों की भी उड़ी धज्जियां
छापेमारी के दौरान मौके पर 30 से 35 मजदूर बिना किसी सुरक्षा उपकरण (सेफ्टी गियर) के जोखिम भरे माहौल में काम करते पाए गए। न तो हेलमेट था, न ग्लव्स, न ही डस्ट मास्क — मजदूरों की जान की परवाह किए बगैर उत्पादन को प्राथमिकता दी जा रही थी।सबसे गंभीर पहलू यह है कि प्रदूषण नियंत्रण (पॉल्यूशन कंट्रोल) के कोई इंतजाम नहीं थे। धूल और डस्ट को रोकने के लिए कोई वॉटर स्प्रिंकलर सिस्टम नहीं, कोई चिमनी फिल्टर नहीं। आसपास के गांवों में रहने वाले लोगों को लगातार प्रदूषण झेलना पड़ रहा था
चिन्मय मैती, प्रतीक अग्रवाल और आयुष अग्रवाल को किसका संरक्षण था प्राप्त ?
जांच में अब तक यह साफ नहीं हो पाया है कि इन तीनों निदेशकों के पीछे कोई बड़ा राजनीतिक संरक्षण था या स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों की मिलीभगत थी लेकिन इतना तय है कि एक साल तक बिना लाइसेंस के इतना बड़ा प्लांट चलाना अकेले इन तीनों के बस की बात नहीं थी। ऐसे में स्थानीय स्तर पर कई लोगों के नाम की चर्चा जोड़ों पर है बताया जाता है कि इस काले कारोबार का रांची से भी तार जुड़ा है और पर्दे के पीछे कई लोग शामिल है

