🌿 विश्व पर्यावरण दिवस विशेष रिपोर्ट
हरियाली का संकल्प — झारखंड में डेढ़ करोड़ पौधे लगाने का महाअभियान
रांची, 5 जून। विश्व पर्यावरण दिवस के पावन अवसर पर झारखंड राज्य सरकार और वन विभाग ने पूरे प्रदेश में एक व्यापक एवं महत्वाकांक्षी पौधारोपण अभियान की शुरुआत की है। इस अभियान के तहत राज्यभर में डेढ़ करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। मुख्यमंत्री कार्यालय से लेकर जिला प्रशासन तक — सभी स्तरों पर इस अभियान को ऐतिहासिक बनाने की तैयारी की गई। इसी कड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बहुचर्चित ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान को भी जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि पर्यावरण संरक्षण की भावना व्यक्तिगत जुड़ाव के साथ मजबूत हो। सरकार की मुख्यमंत्री जन वन विकास योजना के अंतर्गत राज्य के नागरिकों को अपनी निजी भूमि पर वृक्षारोपण हेतु प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिसमें पहले तीन वर्षों तक पौधे लगाने और उनके रखरखाव पर 75% तक की सरकारी सब्सिडी का प्रावधान है। लेकिन जामताड़ा से जो हकीकत सामने आई है उतनी ही चौंकाने वाली निकली —
जामताड़ा में शर्मनाक खुलासा — जड़ विहीन पौधों से हुआ “पंचायत सचिवाल में वृक्षारोपण”
जामताड जिले के तरकोजोड़ी पंचायत भवन में विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर आयोजित पौधारोपण कार्यक्रम ने एक ऐसी तस्वीर पेश की, जिसे देखकर हर जागरूक नागरिक का माथा शर्म से झुक जाए। पंचायत सचिवालय के कर्मियों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों द्वारा पंचायत सचिवालय के सामने जो पौधे जमीन में गाड़े गए, उनमें जड़ें ही नहीं थीं।
यह महज लापरवाही नहीं, बल्कि सरकारी धन और सार्वजनिक विश्वास दोनों के साथ खुला खिलवाड़ है। जड़ विहीन पौधे इस भीषण गर्मी और तपती धूप में भला कैसे जीवित रहते? नतीजा वही हुआ जो होना था — महज दो दिनों के भीतर ये पौधे सूख गए और जो बचे हैं, वे भी नष्ट होने की कगार पर हैं। सवाल यह उठता है कि क्या इन कर्मियों और जनप्रतिनिधियों को इतनी बुनियादी जानकारी भी नहीं थी कि बिना जड़ के पौधा जी नहीं सकता? या फिर यह जानबूझकर किया गया — महज खानापूर्ति के लिए, महज फोटो खिंचवाने के लिए, महज सरकारी रिकॉर्ड में “काम हो गया” दिखाने के लिए? यह घटना उस पूरी सरकारी मशीनरी पर सवाल खड़ा करती है जो करोड़ों रुपये के पर्यावरण अभियानों को लागू करने की जिम्मेदारी उठाती है।
सोशल मीडिया पर वायरल हुई लापरवाही — अब क्या करेगी जामताड़ा जिला प्रशासन?
रांची। जामताड़ा से सामने आई इन तस्वीरों ने सोशल मीडिया पर तूफान ला दिया है। “बिना जड़ वाला पौधा” इन दिनों फेसबुक और व्हाट्सऐप पर तेजी से वायरल हो रहा है। लोग इसे विश्व पर्यावरण दिवस की सबसे बड़ी विडंबना बता रहे हैं — एक तरफ करोड़ों पेड़ लगाने का दावा कर रही है, दूसरी तरफ उसी के कर्मचारी और जनप्रतिनिधि जड़ विहीन पौधे गाड़ रहे हैं।
नागरिकों का गुस्सा स्वाभाविक है और उनके सवाल भी बेहद तीखे हैं —
- 🔴 क्या इन पौधों की खरीद में सरकारी पैसा खर्च हुआ? यदि हां, तो किसके आदेश पर?
- 🔴 संबंधित पंचायत कर्मियों और जनप्रतिनिधियों पर क्या कार्रवाई होगी?
- 🔴 पूरे राज्य में जो डेढ़ करोड़ पौधे लगाए जाने का दावा है, उनकी निगरानी कौन करेगा?
विशेषज्ञों की राय है कि पर्यावरण अभियानों की सफलता केवल संख्या से नहीं, बल्कि पौधों के जीवित रहने और पेड़ बनने से मापी जानी चाहिए। जब तक जमीनी निगरानी, जवाबदेही और पारदर्शिता नहीं होगी, ऐसे अभियान महज कागजी खानापूर्ति बनकर रह जाएंगे।अब देखने वाली बात होगी कि इस मामले को लेकर जामताड़ा जिला प्रशासन कितनी संवेदनशीलता दिखाती है ओर क्या इस मामले में दोषियों पर कार्रवाई करेगी?
📌 संपादकीय नोट: पर्यावरण बचाने की जिम्मेदारी सिर्फ सरकार की नहीं, हम सबकी है। लेकिन जब सरकारी तंत्र ही इस जिम्मेदारी का मजाक उड़ाए, तो जनता को सतर्क और声 उठाने का पूरा अधिकार है।

