हड़िया-दारू छोड़ बनीं आत्मनिर्भर किसान: लालो देवी की मेहनत ने बदली तकदीर, अब हर साल 90 हजार रुपये की कमाई
रामगढ़ | दैनिक स्टेट
झारखंड सरकार की योजनाएं और स्वयं सहायता समूह यदि सही हाथों तक पहुंच जाएं तो किसी की भी किस्मत बदल सकती है। इसका जीवंत उदाहरण हैं रामगढ़ जिले के गोला प्रखंड की पूरबडीह पंचायत निवासी लालो देवी। कभी परिवार का पेट पालने के लिए हड़िया-दारू बेचने को मजबूर लालो देवी आज सफल बकरी पालक, सब्जी उत्पादक और आत्मनिर्भर महिला के रूप में पूरे इलाके में पहचान बना चुकी हैं। उनका संघर्ष आज हजारों ग्रामीण महिलाओं के लिए उम्मीद की नई किरण बन गया है।
गरीबी ने मजबूर किया, लेकिन हिम्मत कभी नहीं टूटी
कभी ऐसा भी समय था जब लालो देवी के परिवार के सामने दो वक्त की रोटी का संकट खड़ा रहता था। आर्थिक तंगी इतनी थी कि मजबूरी में उन्हें हड़िया-दारू बेचने का काम करना पड़ा। समाज की आलोचनाएं, ताने और असम्मान अलग से झेलना पड़ता था। इसके बावजूद उन्होंने परिस्थितियों के आगे घुटने नहीं टेके। उनके मन में हमेशा एक सम्मानजनक जीवन जीने का सपना था। यही सपना आगे चलकर उनकी सबसे बड़ी ताकत बना और संघर्ष की राह पर डटे रहने का हौसला देता रहा।
स्वयं सहायता समूह बना जिंदगी का टर्निंग प्वाइंट
वर्ष 2013 में झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS) की पहल पर गांव में स्वयं सहायता समूह का गठन हुआ। लालो देवी ने कामधेनु महिला विकास संघ से जुड़कर नियमित बचत शुरू की। बैठकों में उन्हें वित्तीय प्रबंधन, सरकारी योजनाओं और आत्मनिर्भर बनने के गुर सीखने को मिले। इसी दौरान फुलो-झानो आशीर्वाद अभियान की जानकारी मिली। समूह की बदौलत राशन कार्ड बना, सरकारी योजनाओं का लाभ मिला और सबसे बड़ी बात—उन्होंने हड़िया-दारू बेचने का काम हमेशा के लिए छोड़ने का साहस जुटाया। यही वह मोड़ था, जहां से उनकी नई जिंदगी की शुरुआत हुई।
तीन बकरियों से शुरू हुआ सफर, खेतों ने भी बदल दी तस्वीर
फुलो-झानो आशीर्वाद अभियान के तहत मिली 10 हजार रुपये की ब्याजमुक्त सहायता से लालो देवी ने तीन बकरियां खरीदीं। मेहनत और सही देखभाल के दम पर यह छोटा प्रयास धीरे-धीरे सफल व्यवसाय में बदल गया। आज उनके पास 12 बकरियां हैं और बकरी पालन से हर साल अच्छी आय हो रही है। इसके बाद बैंक लिंकेज (CCL) के तहत मिले एक लाख रुपये के ऋण से उन्होंने आलू, प्याज और कचू की व्यावसायिक खेती शुरू की। आधुनिक खेती, समय पर सिंचाई और बाजार की सही समझ ने उनकी मेहनत को बेहतर मुनाफे में बदल दिया।
अब मिसाल बनीं लालो देवी, गांव की महिलाएं ले रहीं प्रेरणा
आज लालो देवी बकरी पालन से लगभग 40 हजार रुपये और सब्जी की खेती से करीब 50 हजार रुपये सालाना कमा रही हैं। यानी उनकी कुल वार्षिक आय करीब 90 हजार रुपये पहुंच चुकी है। सबसे बड़ी बात यह है कि जो महिला कभी समाज की उपेक्षा का सामना करती थी, आज वही महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा दे रही है। गांव की कई महिलाएं उनके अनुभव से सीख लेकर स्वयं सहायता समूहों से जुड़ रही हैं और वैकल्पिक रोजगार अपना रही हैं। लालो देवी की कहानी यह साबित करती है कि सही मार्गदर्शन, सरकारी सहयोग और मजबूत इरादों के सामने गरीबी भी हार मान लेती है।
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Friday, November 6

