धर्मेंद्र पटेल । दैनिक स्टेट हेड
मानसून का विडंबनापूर्ण खेल: रांची को सोना, बाकी को खोना
बोकारो/रांची – झारखंड में इस बार मानसून का स्वागत किया गया तो था, लेकिन उसकी सौगात ने सभी को निराश कर दिया है। 1 जून से 18 जून के बीच राज्य में केवल 30.8 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जबकि सामान्य तौर पर 74.9 मिलीमीटर वर्षा होनी चाहिए थी। यानी कुल मिलाकर 59 प्रतिशत की भारी कमी। मानसून विभाग के आंकड़े खुद एक दहलीज भरी कहानी कह रहे हैं। लेकिन रांची की किस्मत अलग नजर आ रही है – यहाँ 86.9 मिलीमीटर बारिश हुई है, जो सामान्य 77.5 मिलीमीटर से 12 प्रतिशत अधिक है। इस तरह रांची अकेले ही मानसून के मानदंड पर खरा उतरा है, जबकि बाकी 23 जिले इस मौसमी महायज्ञ में अधूरे रह गए हैं।
गढ़वा से साहिबगंज तक: बारिश का ‘शून्य टॉलरेंस’ नीति
मानसून की त्रासदी का सबसे भीषण चेहरा पलामू प्रमंडल और संताल परगना के जिलों में दिख रहा है। गढ़वा में तो विडंबना देखिए – पूरे 18 दिनों में एक भी बूंद नहीं गिरी! जहाँ 46.7 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए थी, वहाँ मौसम विभाग के पास रिकॉर्ड करने के लिए कुछ नहीं है। यह 100 प्रतिशत की कमी है। गढ़वा के बाद देखिए अन्य जिलों की दास्तान – पलामू में 97 प्रतिशत, साहिबगंज में 97 प्रतिशत, चतरा में 95 प्रतिशत, लोहरदगा में 94 प्रतिशत, सरायकेला-खरसावां में 84 प्रतिशत और खूंटी में 77 प्रतिशत की भारी कमी दर्ज हुई है। मौसम वैज्ञानिकों के चेहरों पर चिंता की लकीरें गहरी हो गई हैं, क्योंकि यह सूखा का अग्रदूत हो सकता है।
किसानों की हरियाली का सपना धराशायी: धान की रोपाई में खतरे की घंटी
झारखंड के करोड़ों किसानों के लिए जून का महीना पवित्र समय होता है। यह महीना धान की बिचड़ा तैयारी का गोल्डन पीरियड है, और इसी पर पूरी खरीफ फसल निर्भर करती है। लेकिन इस बार बारिश की कमी ने किसानों के सपनों में पानी भर दिया है। ग्रामीण इलाकों में खेतों के किनारे खड़े किसान आकाश की ओर निगाहें गड़ाए हैं, प्रार्थना करते हुए कि कम से कम अगले कुछ दिनों में ढंग की बारिश हो जाए। राज्य के कृषि विभाग की चिंता का कारण यह है कि बारिश में जो देरी हो रही है, उससे धान की रोपाई का पूरा कैलेंडर बिगड़ सकता है। खेतों में सिंचाई के लिए भूजल पर दबाव बढ़ेगा, और बिजली की खपत भी बढ़ेगी। इसके अलावा, देरी से रोपाई का मतलब कटाई में भी देरी, जो बाजार में खरीद-बिक्री की समस्या खड़ी कर सकता है।
मौसम विभाग की चेतावनी: अगली बारिश से ही बदलेगा खेल
राज्य के मौसम विभाग ने अभी सभी का दिल टूटने नहीं दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले 10-15 दिनों में बारिश के पैटर्न में सुधार आ सकता है। आईएमडी (भारतीय मौसम विभाग) की ताजा रिपोर्ट से जताई गई है कि दूसरे सप्ताह के अंत तक मानसून सामान्य से अधिक सक्रिय हो सकता है। यदि यह पूर्वानुमान सही साबित हो, तो भारतीय मौसम प्रणाली अपनी ट्रैक पर वापस आ सकती है। किसानों के लिए यह संदेश कुछ राहत का काम दे रहा है, लेकिन साथ ही यह भी पता चल गया है कि नीचे की अपेक्षा में खेत सूख न जाएं, इसलिए सरकार को तुरंत सिंचाई व्यवस्था को सुदृढ़ करना होगा। पानी की बर्बादी को रोकते हुए, जहां-जहां संभव हो, छोटी नहरों और तालाबों से खेतों की सिंचाई की तैयारी शुरू कर दी गई है।

