धर्मेंद्र पटेल । दैनिक स्टेट
मिड डे मील में ‘जहर’ का शक! सरकारी स्कूलों में बच्चों की थाली से बरामद संदिग्ध सरसों तेल और मसाले ने उड़ाए होश
गढ़वा: सरकारी स्कूलों में बच्चों को मिलने वाला मध्याह्न भोजन आखिर कितना सुरक्षित है? यह सवाल गढ़वा जिले के बरडीहा प्रखंड से सामने आए एक मामले ने खड़ा कर दिया है। प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) प्रवीण कुमार ने सेमरी गांव के पीएम श्री विद्यालय और आदर गांव के सरकारी विद्यालय में औचक निरीक्षण किया। जांच के दौरान मिड डे मील में इस्तेमाल हो रहे सरसों तेल और मसालों पर संदेह हुआ। प्रारंभिक जांच में तेल से जले हुए मोबिल जैसी गंध आने और मसालों की गुणवत्ता संदिग्ध मिलने पर दोनों के नमूने जब्त कर लिए गए। अब इन्हें खाद्य सुरक्षा विभाग की प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा जाएगा। यदि रिपोर्ट में मिलावट की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों पर कड़ी कार्रवाई हो सकती है।
‘अगर बच्चों को कुछ हो जाता तो जिम्मेदार कौन?’ अभिभावकों का फूटा गुस्सा, जांच के बाद बढ़ी बेचैनी
बीडीओ की कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय अभिभावक भी विद्यालय पहुंचे। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की सेहत के साथ किसी भी तरह का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अभिभावकों का कहना है कि यदि वास्तव में मिलावटी तेल और नकली मसालों से भोजन तैयार किया जा रहा था तो यह बेहद गंभीर मामला है। उन्होंने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच, दोषियों पर कठोर कार्रवाई और भविष्य में खाद्य सामग्री की नियमित जांच की मांग की। फिलहाल प्रशासन ने खाद्य सामग्री के नमूने सुरक्षित रख लिए हैं और जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
एक साल पहले हार्पिक वाला गोलगप्पा, अब मिड डे मील पर सवाल… आखिर क्यों बार-बार सामने आ रहे हैं ऐसे मामले?
यह पहली बार नहीं है जब इस क्षेत्र से खाद्य सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठे हों। करीब एक वर्ष पहले इसी इलाके में गोलगप्पे के पानी में हार्पिक मिलाने और आटा पैरों से गूंधने का वीडियो वायरल हुआ था, जिसने पूरे देश में सुर्खियां बटोरी थीं। अब सरकारी स्कूलों के मिड डे मील में संदिग्ध खाद्य सामग्री मिलने के बाद लोगों के मन में फिर वही सवाल उठ रहे हैं कि आखिर खाद्य पदार्थों की निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी है। हालांकि दोनों मामलों की प्रकृति अलग है, लेकिन लगातार सामने आ रही घटनाओं ने प्रशासनिक निगरानी को लेकर बहस तेज कर दी है।
पाकुड़ समेत पूरे झारखंड के अभिभावकों के लिए चेतावनी! बच्चों की थाली पर रखें नजर, शिकायत दिखे तो तुरंत करें रिपोर्ट
गढ़वा की घटना ने सिर्फ एक जिले नहीं, बल्कि पूरे झारखंड के सरकारी विद्यालयों में संचालित मध्याह्न भोजन व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि मिड डे मील बच्चों के पोषण का महत्वपूर्ण माध्यम है, इसलिए खाद्य सामग्री की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होना चाहिए। अभिभावकों को भी समय-समय पर स्कूल जाकर भोजन की गुणवत्ता पर नजर रखनी चाहिए। यदि कहीं तेल, मसाले या भोजन की गुणवत्ता संदिग्ध लगे तो इसकी सूचना तुरंत विद्यालय प्रबंधन, प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी या खाद्य सुरक्षा विभाग को देनी चाहिए। फिलहाल गढ़वा मामले में अंतिम सच्चाई खाद्य जांच रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएगी, लेकिन इस घटना ने पूरे राज्य के अभिभावकों की चिंता जरूर बढ़ा दी है।

