काला कोयला, लाल खून — और पाँच लाख का “मुआवजा राज”
दो बेगुनाहों की मौत ने खोल दिया चुरचू के अवैध कोयला तंत्र का सबसे बड़ा राज!
हजारीबाग : रात का सन्नाटा चीरते हुए एक कोयला लदा ट्रक जब 31 मई 2026 की देर रात चुरचू थाना क्षेत्र के बोदरा-हत्यारी मुख्य मार्ग पर दौड़ा, तो उसने दो जिंदगियाँ रौंद दीं। बागजोबरा गाँव के आकाश हांसदा (28 वर्ष, पुत्र सोहराय हांसदा) और राजेंद्र बास्के (22 वर्ष, पुत्र स्व. मोतीलाल बास्के) — दोनों सारूबेड़ा गाँव के एक शोक कार्यक्रम से लौट रहे थे। ट्रक (BR 02 GA-9310) की टक्कर इतनी भीषण थी कि स्कूटी (JH02BM-9893) सवार दोनों युवक करीब 100 फीट तक घिसटते चले गए। घटन में दोनों की मौत हो गई।बागजोबरा में मातम पसर गया था । ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा और 10 घंटे तक चुरचू-हत्यारी मुख्य मार्ग जाम रहा। चार थानों के थानेदारों को मौके पर आना पड़ा।
लेकिन इस पूरे घटनाक्रम में जो सबसे बड़ा सवाल उठा — वह था उन दो नामों का, जिन्होंने मृतकों के परिवारों को पाँच लाख रुपए का मुआवजा दिया।
❓ कौन हैं संदीप,अनिल और प्रभात — जिन्होंने दे दिए पाँच लाख?
पुलिस की मध्यस्थता में जब शव उठाने की प्रक्रिया हुई, तो मृतकों के परिजनों को आश्वासन दिया गया कि ” संदीप ,अनिल और प्रभात “ दोनों परिवारों को दो-दो लाख रुपए देंगे। अंतिम संस्कार के लिए तत्काल 50-50 हजार रुपए दिए गए और तीन दिनों के भीतर शेष तीन लाख देने का वादा किया गया।इस तरह देखा जाये तो कुल मुआवजा = ₹5,00,000 दिया गया । अब सवाल यह है संदीप ,अनिल और प्रभात — न तो विधायक हैं, न सांसद।न जनप्रतिनिधि हैं, न सरकार के किसी अंग का हिस्सा। और न ही दुर्घटनाग्रस्त ट्रक (BR 02 GA-9310) के मालिक भी नहीं हैं — वाहन ऐप से जाँच में यह स्पष्ट हो चुका है।तो फिर किस हैसियत से और किस जिम्मेदारी के तहत इन्होंने पाँच लाख रुपए दिए?क्या यह मुआवजा असल में उस “गुनाह की कीमत” था, जो इस अवैध कोयला तंत्र ने दो परिवारों से वसूला?
🏭 करगी का “काला डिपो” — रात के अँधेरे में चलता है साम्राज्य
सूत्रों के अनुसार चुरचू थाना क्षेत्र के करगी में दो अवैध कोयला डिपो धड़ल्ले से संचालित हो रहा है। शाम होते ही ट्रैक्टर के माध्यम से यह अवैध कोयला गिराया जात है और फिर रात में ट्रक में भर कर इन अवैध कोयला को मंडी भेज दिया जात है प्रतिदिन लगभग इस आधा दर्जन ट्रकों से चुरचू → हजारीबाग,चुरचू → विष्णुगढ़ के रास्तों कोयला बिहार और उत्तर प्रदेश की मंडियों में भेजा जा रहा है ।इससे सरकार को करोड़ों रुपए के राजस्व की चपत लग रही हैगाँव के युवक जान जोखिम में डालकर चीख-चीखकर इस धंधे की दास्ताँ सुना रहे हैं — पर स्थानीय पुलिस की “कान” तक आवाज नहीं पहुँचती!
पर्दे के पीछे का सच: मुआवजा या मिलीभगत?
घटनास्थल पर उभरी दो कहानियों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पर्दे पर यह दिखा कि सरकारी लाभ की घोषणा के बाद जाम हटा, लेकिन पर्दे के पीछे की सच्चाई कुछ और ही संकेत दे रही है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, पुलिस ने मध्यस्थ बनकर पाँच लाख का मुआवजा दिलवाया, पर चुरचू थाने की प्राथमिकी में मुख्य आरोपी—अवैध कोयला कारोबारी—का नाम ही नहीं है।
🔜 अगला अंक : “बड़ा मुखिया” — कौन है वो जो पूरे तंत्र से “सामंजस्य” बिठाता है?
दैनिक स्टेट के पास एक और बड़ा खुलासा तैयार है। वह “मुखिया” जो इस पूरे अवैध कोयला साम्राज्य के पीछे बैठकर सूत्र हिलाता है — पढ़िए अगले अंक में ।

