रात के तीन बजे आईसीयू में आग, बिजली की एक चिंगारी ने लील लीं कई जिंदगियां”
मुजफ्फरपुर, 4 जून 2026 — बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के ब्रह्मपुरा थाना क्षेत्र में स्थित प्रसाद हॉस्पिटल की पांचवीं मंजिल पर बने आईसीयू वार्ड में गुरुवार तड़के रात करीब 3 बजे अचानक भीषण आग भड़क उठी।
घटना कैसे हुई — कदम दर कदम:
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- रात 3:00 बजे — अस्पताल की पांचवीं मंजिल स्थित आईसीयू में शॉर्ट सर्किट के कारण आग लगी।
- देखते ही देखते — आग की लपटें फैलने लगीं और पूरे आईसीयू वार्ड में घना काला जहरीला धुआं भर गया।
- आईसीयू में उस समय — 20 से अधिक मरीज भर्ती थे, जो वेंटिलेटर और ऑक्सीजन सपोर्ट पर थे।
- सुबह 3:55 बजे — अग्निशमन विभाग को सूचना मिली और एक दर्जन दमकल गाड़ियां मौके पर रवाना हुईं।
- टीम के पहुंचने पर — पूरा वार्ड धुएं में डूबा था, दरवाजे और खिड़कियां बंद थीं, मरीज अंदर फंसे थे।
- करीब 1 घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया।
शुरुआती जांच में आग का कारण शॉर्ट सर्किट बताया जा रहा है, लेकिन तकनीकी जांच अभी जारी है।
मौत का आंकड़ा विवादित — डीएम बोले 3, दमकल अधिकारी ने कहा 10; परिजन बोले सच् इस हादसे में यह उठ रहा है कि आखिर कितने लोगों की जान गई?
- जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन ने आधिकारिक रूप से 3 मौतों की पुष्टि की है।
- अग्निशमन पदाधिकारी आरएन पांडे ने 10 मौतें होने की बात कही।
- परिजनों का दावा है कि मृतकों की संख्या आधा दर्जन से अधिक है।
पुष्टि शुदा मृतकों के नाम:
- शशांक कुमार — औराई, मुजफ्फरपुर
- गीता देवी — मोतीपुर, मुजफ्फरपुर
- उदय कुमार — तरियानी, शिवहर
- कृष्ण नंदन — पहचान जारी
- चंचला कुमारी — पहचान जारी
- एक अज्ञात — शिनाख्त अभी बाकी
जलते मरीजों को छोड़ भाग गया स्टाफ — खिड़कियां तोड़कर दमकल ने बचाई जानें, परिजनों ने खुद कूदे मौत के मुंह में”
इस पूरे हादसे का सबसे शर्मनाक पहलू यह रहा कि आग लगते ही अस्पताल का लगभग पूरा स्टाफ मरीजों को छोड़कर फरार हो गया।
घटना की पूरी कहानी — परिजनों की जुबानी:
- आग लगते ही — अस्पताल के डॉक्टर, नर्स और कर्मचारी अपनी जान बचाकर भाग निकले।
- ICU के बाहर खड़े परिजन जब अंदर से चीखें सुन रहे थे, तो कोई स्टाफ मदद को नहीं आया।
- परिजन खुद धुएं के बीच आईसीयू की तरफ दौड़े और अपने मरीजों को निकालने की कोशिश की।
- फायर ब्रिगेड के मौके पर पहुंचने के बाद दमकल कर्मियों ने खिड़कियां और दरवाजे तोड़कर फंसे मरीजों को बाहर निकाला।
- 20+ मरीजों को सुरक्षित बाहर निकालकर एम्बुलेंस से दूसरे अस्पतालों में भेजा गया।
एक परिजन का बयान:
“हम बाहर खड़े थे, अंदर से सिर्फ चीखें आ रही थीं। कोई स्टाफ नहीं था। हमने खुद जाकर कई लोगों को निकाला।”

