काशी दर्शन का सफर बना काल
बोधगया से वाराणसी जा रही बस की ट्रक से भीषण टक्कर, आंध्र प्रदेश के 3 तीर्थयात्रियों की मौत, 20 घायल
रविवार की मध्यरात्रि ठीक 12 बजे औरंगाबाद जिले के मुफस्सिल थाना क्षेत्र अंतर्गत NH-19 पर भवानी होटल के समीप एक दर्दनाक सड़क दुर्घटना घटित हुई। आंध्र प्रदेश के नेल्लूर जिले से आए करीब 40 श्रद्धालु बोधगया में बुद्ध स्मारकों के दर्शन करने के बाद काशी विश्वनाथ मंदिर की यात्रा पर एक निजी टूरिस्ट बस से रवाना हुए थे। NH-19 पर देव मोड़ से पहले पहुँचने पर बस के चालक ने तेज गति से ओवरटेक करने का प्रयास किया। उसी समय सड़क किनारे एक सरिया लदा ट्रक-ट्रेलर खड़ा था, जिसका चालक यूरिया डलवा रहा था। अनियंत्रित बस सीधे ट्रक के पिछले हिस्से में जा घुसी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि बस के आगे का पूरा हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया और परखच्चे उड़ गए। चीख-पुकार से पूरा इलाका गूँज उठा। मौके पर पहुँची पुलिस ने बस और ट्रक दोनों को जब्त कर लिया। स्थानीय लोगों की मदद से घायलों को सदर अस्पताल पहुँचाया गया, जहाँ चिकित्सकों ने तीन को मृत घोषित कर दिया। 22 यात्री घायल बताए गए हैं, जिनमें से 7 से 8 की हालत नाजुक होने के कारण उन्हें बेहतर इलाज के लिए उच्चतर चिकित्सा केंद्र रेफर कर दिया गया है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि बस चालक के विरुद्ध लापरवाहीपूर्वक वाहन चलाने का मामला दर्ज किया जा रहा है। घटनास्थल पर NH-19 पर करीब एक घंटे तक यातायात बाधित रहा, जिसे पुलिस ने क्रेन की सहायता से वाहनों को हटाकर सामान्य किया।
नेल्लूर के संगमा गाँव से तीन लोगों की मौत, समूचा गाँव शोक में डूबा
हजरतया (50), फातमावती (43), पशुलेट वेंकटेश (64) — तीन परिवारों की खुशियाँ लूटीं; परिजनों को सूचना देने में जुटा प्रशासन
नेल्लूर (आंध्र प्रदेश), 8 जून — विशेष संवाददाता
इस भीषण हादसे में जिन तीन जिंदगियों ने दम तोड़ा, वे सभी आंध्र प्रदेश के नेल्लूर जिले के संगमा गाँव के निवासी थे। मृतकों की पहचान हजरतया (50 वर्ष) , पशुलेट वेंकटेश (64 वर्ष) और फातमावती (43 वर्ष) के रूप में हुई है। तीनों एक ही गाँव के रहने वाले थे और इस धार्मिक यात्रा पर साथ निकले थे। बोधगया में भगवान बुद्ध के दर्शन के बाद वाराणसी में बाबा विश्वनाथ के दर्शन का उनका सपना अधूरा ही रह गया। संगमा गाँव में सोमवार सुबह जैसे ही इस दुर्घटना की खबर पहुँची, वहाँ कोहराम मच गया। हजरतया के परिवार में पत्नी और दो छोटे बच्चे हैं। वे गाँव में खेती-किसानी करते थे और पहली बार इतनी दूर तीर्थयात्रा पर गए थे। पशुलेट वेंकटेश गाँव के बुजुर्ग और सम्मानित व्यक्ति थे, उनके तीन बेटे शहर में नौकरी करते हैं। फातमावती एक विधवा महिला थीं जो अपने भाई के साथ यात्रा पर निकली थीं। तीनों के शव पोस्टमॉर्टम के बाद परिजनों को सौंपने की प्रक्रिया जारी है। नेल्लूर जिला प्रशासन ने संगमा गाँव के लिए एक विशेष टीम रवाना की है जो परिजनों को बिहार लाने-ले जाने में मदद करेगी।घायलों में सुभनमा, नरेंद्र रेड्डी और प्रसाद सहित कई अन्य श्रद्धालु शामिल हैं। सदर अस्पताल औरंगाबाद में बताया गया कि 7-8 घायलों की हालत गंभीर होने के कारण उन्हें रेफर किया गया है। घायलों में से अधिकांश को सिर, रीढ़ और हाथ-पैरों में गंभीर चोटें आई हैं। परिजनों के आंसुओं और दुआओं के बीच अस्पताल में इलाज जारी है।

