🗞️ “धर्म बदला तो रास्ता बदला!” — कुमारडुंगी में 18 लोगों के धर्मांतरण पर गांव ने किया हुक्का-पानी बंद
चाईबासा के कुमारडुंगी थाना क्षेत्र अंतर्गत हल्दी पोखर गांव में धर्मांतरण का मामला अब सामाजिक टकराव का रूप ले चुका है। गांव के चार परिवारों के कुल 18 लोगों ने ईसाई धर्म अपना लिया, जिसके बाद गांव के सारना समाज के लोगों ने उनका सामाजिक बहिष्कार कर दिया।
धर्म परिवर्तित परिवारों का आरोप है कि उन्हें गांव के तालाब से नहाने, चापाकल से पानी लेने, दुकान से सामान खरीदने और जंगल से लकड़ी, पत्ता व दातून लाने से रोका जा रहा है। इसको लेकर सभी 18 लोग कुमारडुंगी थाना पहुंचे और मौखिक शिकायत दर्ज कराई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने दोनों पक्षों को थाना परिसर बुलाया। बड़ी संख्या में पहुंचे सारना समाज के लोगों ने कहा कि गांव की परंपरा और धार्मिक व्यवस्था बचाने के लिए यह नियम बनाया गया है कि जो व्यक्ति सारना धर्म छोड़कर ईसाई धर्म अपनाएगा, वह गांव के सामूहिक संसाधनों का उपयोग नहीं करेगा।
ग्रामीणों ने बताया कि वर्ष 2017 में सबसे पहले बिरु भुमिज ने धर्म परिवर्तन किया था। इसके बाद धीरे-धीरे यह संख्या 18 तक पहुंच गई। ग्रामीणों का कहना है कि यदि अब रोक नहीं लगी तो आने वाले समय में और लोग धर्मांतरण कर सकते हैं।
🗞️ “आस्था बनाम संविधान” — धर्मांतरण पर गांव की परंपरा और कानून आमने-सामने
मामले में अंचलाधिकारी मुक्ता सोरेंग ने ग्रामीणों को संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 16 और 17 की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति के साथ धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं किया जा सकता। सार्वजनिक उपयोग की वस्तुओं जैसे पानी, जंगल और रास्तों से किसी को वंचित नहीं किया जा सकता।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि पानी या जंगल से वंचित करने के कारण किसी की मृत्यु होती है, तो इसकी जिम्मेदारी गांव के लोगों पर तय होगी।
इस पर ग्रामीणों ने तर्क दिया कि उनके गांव की सुरक्षा उनकी वन देवी, संस्कृति और परंपरा से जुड़ी है। उन्होंने कहा कि गांव घने जंगल से घिरा होने के बावजूद सुरक्षित है, क्योंकि वे अपनी परंपराओं का पालन करते हैं। वर्ष 2006 से वन समिति बनाकर जंगल की रक्षा की जा रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि ईसाई धर्म अपनाने वाले लोग जंगल से लकड़ी, पत्ता और दातून लेने लगेंगे तो उनकी धार्मिक व्यवस्था दूषित हो जाएगी। गांव वालों ने धर्म परिवर्तित परिवारों से वापस सारना धर्म में लौटने का आग्रह भी किया, लेकिन उन्होंने साफ इंकार कर दिया।
अंततः पुलिस, अंचलाधिकारी और ग्रामीण मुंडा की मौजूदगी में यह निर्णय लिया गया कि धर्म परिवर्तित परिवार गांव के सामूहिक स्थलों का उपयोग नहीं करेंगे और पेयजल के लिए सामने स्थित चुआ (प्राकृतिक जलस्रोत) का उपयोग करेंगे।
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Sunday, September 6

