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  • Sukma News: सुकमा के गोगुंडा में माओवादी लीडर रमन्ना का स्मारक ध्वस्त, बस्तर में कमजोर होता नक्सलवाद का गढ़

    Sukma News: सुकमा के गोगुंडा में माओवादी लीडर रमन्ना का स्मारक ध्वस्त, बस्तर में कमजोर होता नक्सलवाद का गढ़

    सुकमा: 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद की जड़ें बस्तर से उखाड़कर फेंकने के लिए जवान दिन रात जंगलों की खाक छान रहे हैं. इसी कड़ी में आज गोगुंडा के जंगल में बने माओवादी लीडर रमन्ना का स्मारक जवानों ने जमींदोज कर दिया. जिस तेजी के साथ नक्सलवाद का खात्मा बस्तर में हो रहा है उससे उम्मीद है कि जल्द ही बस्तर अपने तय समय सीमा के भीतर नक्सल मुक्त संभाग बन जाएगा.

    माओवादी लीडर रमन्ना का स्मारक जवानों ने जमींदोज कर दिया

    दरअसल, सीआरपीएफ की 74वीं बटालियन के जवान कमांडेंट हिमांशु पांडे के निर्देश पर एंटी नक्सल ऑपरेशन के लिए जंगलों में निकले. सर्चिंग के दौरान जवानों को जंगल में एक नक्सली स्मारक नजर आया. जवानों ने पास जाकर देखा तो पाया कि वहां पर मारे गए नक्सली का स्मारक माओवादियों ने उसकी याद में बना रखा है.

    दहशत का प्रतीक था स्मारक

    जिस स्मारक को ध्वस्त किया गया, वह किसी सामान्य व्यक्ति का नहीं था. यह स्मारक था कुख्यात माओवादी नेता रमन्ना का जिसका नाम कभी तेलंगाना, ओडिशा और छत्तीसगढ़ में खौफ का दूसरा नाम माना जाता था. तेलंगाना के वारंगल का रहने वाला रमन्ना माओवादियों की सेंट्रल कमेटी का सचिव रहा था. उस पर तीन राज्यों में कुल मिलाकर करीब 2.40 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था.

    रमन्ना की पहचान केवल एक नाम तक सीमित नहीं थी, वह कई बड़े नक्सली षड्यंत्रों और हमलों की रणनीतियों से जुड़ा रहा था. दिसंबर 2019 में उसकी मृत्यु की खबर आई, लेकिन उसकी विचारधारा और नेटवर्क का असर लंबे समय तक महसूस किया गया. इसी प्रभाव को बनाए रखने के लिए संगठन ने ऐसे स्मारकों को शहादत के प्रतीक के रूप में खड़ा किया ताकि डर जिंदा रहे, और असर कायम रहे.

    नक्सली स्मारक: रणनीति का हिस्सा

    सुरक्षा विशेषज्ञ बताते हैं कि नक्सली स्मारक भावनात्मक श्रद्धांजलि भर नहीं होते. इनके पीछे गहरी मनोवैज्ञानिक रणनीति होती है, ग्रामीणों के मन में भय बैठाना, संगठन की ताकत का प्रदर्शन, नई पीढ़ी को वैचारिक रूप से प्रभावित करना, हिंसा को शहादत के रूप में पेश करना. इसी मानसिक कब्जे को तोड़ना इस कार्रवाई का मूल उद्देश्य था.

    रणनीतिक कार्रवाई: हर कदम सतर्क

    स्मारक ध्वस्तीकरण से पहले पूरे इलाके की गहन सर्चिंग की गई. संभावित खतरे को देखते हुए सुरक्षा घेरा मजबूत किया गया. चारों दिशाओं से मोर्चा संभाला गया ताकि किसी भी तरह की माओवादी प्रतिक्रिया को तुरंत निष्क्रिय किया जा सके. जब स्मारक पर पहला प्रहार हुआ, वह सिर्फ सीमेंट पर नहीं था वह माओवाद की मानसिक पकड़ पर सीधा वार था. कुछ ही मिनटों में चार दशक पुराना भय मलबे में बदल गया. पत्थरों की गिरती आवाज़ के साथ वहां मौजूद ग्रामीणों की आंखों में राहत साफ दिखाई दी. वर्षों से जमा खामोशी जैसे टूट रही थी. एक बुजुर्ग ग्रामीण की आंखें नम थी. बुजुर्ग ने चंद शब्दों में कहा, कई सालों से हम इसे देख रहे थे, हमेशा डर लगा रहता था. आज पहली बार लग रहा है कि हम सच में आज़ाद हैं.

    टूट रहा नक्सलवाद का झूठा तिलिस्म

    CRPF 74 वाहिनी के असिस्टेंट कमांडेंट ने स्पष्ट शब्दों में कहा, माओवाद केवल हथियारों से नहीं लड़ता, वह प्रतीकों और डर के जरिए लोगों के दिमाग पर कब्जा करता है. ऐसे अवैध स्मारकों को हटाना जरूरी है, ताकि भय की जड़ पूरी तरह खत्म हो और विकास का रास्ता खुले. यह बयान बताता है कि सुरक्षा बलों की लड़ाई अब सिर्फ जंगलों तक सीमित नहीं, बल्कि विचारधाराओं के खिलाफ भी है. स्मारक हटते ही गांव का माहौल बदला हुआ दिखा. विशेषज्ञ मानते हैं कि डर के प्रतीक हटते ही विकास जमीन पर उतरता है. अब यहां सड़क और संचार सुविधाओं का विस्तार, स्वास्थ्य और शिक्षा सेवाओं का तेजी से होगा.

  • चाईबासा में 18 लोगों का धर्मांतरण, गांव ने किया सामाजिक बहिष्कार

    चाईबासा में 18 लोगों का धर्मांतरण, गांव ने किया सामाजिक बहिष्कार

    🗞️ “धर्म बदला तो रास्ता बदला!” — कुमारडुंगी में 18 लोगों के धर्मांतरण पर गांव ने किया हुक्का-पानी बंद
    चाईबासा के कुमारडुंगी थाना क्षेत्र अंतर्गत हल्दी पोखर गांव में धर्मांतरण का मामला अब सामाजिक टकराव का रूप ले चुका है। गांव के चार परिवारों के कुल 18 लोगों ने ईसाई धर्म अपना लिया, जिसके बाद गांव के सारना समाज के लोगों ने उनका सामाजिक बहिष्कार कर दिया।
    धर्म परिवर्तित परिवारों का आरोप है कि उन्हें गांव के तालाब से नहाने, चापाकल से पानी लेने, दुकान से सामान खरीदने और जंगल से लकड़ी, पत्ता व दातून लाने से रोका जा रहा है। इसको लेकर सभी 18 लोग कुमारडुंगी थाना पहुंचे और मौखिक शिकायत दर्ज कराई।
    मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने दोनों पक्षों को थाना परिसर बुलाया। बड़ी संख्या में पहुंचे सारना समाज के लोगों ने कहा कि गांव की परंपरा और धार्मिक व्यवस्था बचाने के लिए यह नियम बनाया गया है कि जो व्यक्ति सारना धर्म छोड़कर ईसाई धर्म अपनाएगा, वह गांव के सामूहिक संसाधनों का उपयोग नहीं करेगा।
    ग्रामीणों ने बताया कि वर्ष 2017 में सबसे पहले बिरु भुमिज ने धर्म परिवर्तन किया था। इसके बाद धीरे-धीरे यह संख्या 18 तक पहुंच गई। ग्रामीणों का कहना है कि यदि अब रोक नहीं लगी तो आने वाले समय में और लोग धर्मांतरण कर सकते हैं।
    🗞️ “आस्था बनाम संविधान” — धर्मांतरण पर गांव की परंपरा और कानून आमने-सामने
    मामले में अंचलाधिकारी मुक्ता सोरेंग ने ग्रामीणों को संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 16 और 17 की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति के साथ धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं किया जा सकता। सार्वजनिक उपयोग की वस्तुओं जैसे पानी, जंगल और रास्तों से किसी को वंचित नहीं किया जा सकता।
    उन्होंने चेतावनी दी कि यदि पानी या जंगल से वंचित करने के कारण किसी की मृत्यु होती है, तो इसकी जिम्मेदारी गांव के लोगों पर तय होगी।
    इस पर ग्रामीणों ने तर्क दिया कि उनके गांव की सुरक्षा उनकी वन देवी, संस्कृति और परंपरा से जुड़ी है। उन्होंने कहा कि गांव घने जंगल से घिरा होने के बावजूद सुरक्षित है, क्योंकि वे अपनी परंपराओं का पालन करते हैं। वर्ष 2006 से वन समिति बनाकर जंगल की रक्षा की जा रही है।
    ग्रामीणों का कहना है कि यदि ईसाई धर्म अपनाने वाले लोग जंगल से लकड़ी, पत्ता और दातून लेने लगेंगे तो उनकी धार्मिक व्यवस्था दूषित हो जाएगी। गांव वालों ने धर्म परिवर्तित परिवारों से वापस सारना धर्म में लौटने का आग्रह भी किया, लेकिन उन्होंने साफ इंकार कर दिया।
    अंततः पुलिस, अंचलाधिकारी और ग्रामीण मुंडा की मौजूदगी में यह निर्णय लिया गया कि धर्म परिवर्तित परिवार गांव के सामूहिक स्थलों का उपयोग नहीं करेंगे और पेयजल के लिए सामने स्थित चुआ (प्राकृतिक जलस्रोत) का उपयोग करेंगे।

  • औरंगाबाद में 4 नाबालिग बच्चियों की रहस्यमयी मौत, गांव में पसरा सन्नाटा

    चार मासूमों की रहस्यमयी मौत: ज़हर या कोई और साजिश? हसपुरा गांव में पसरा सन्नाटा
    औरंगाबाद जिले के हसपुरा थाना क्षेत्र के सैदपुर गांव में चार नाबालिग बच्चियों की एक साथ मौत ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। यह घटना जमाल बिगहा जाने वाली सड़क के किनारे पइन और तालाब के पास हुई। बताया जा रहा है कि पांच नाबालिग बच्चियां वहां बैठी थीं, जिनमें से चार की मौत हो गई जबकि एक बच्ची किसी तरह बचकर घर पहुंची और परिजनों को जानकारी दी। इलाज के बाद उसकी जान बच गई, लेकिन बाकी चार बच्चियां पास के गेहूं के खेत में चली गईं, जहां तड़पते हुए उनकी मौत हो गई। पुलिस ने अभी जहर खाने की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। परिजनों ने चारों शवों का पोस्टमार्टम कराए बिना अंतिम संस्कार कर दिया, जिससे पूरे मामले पर रहस्य गहरा गया है।
    🔹पुलिस से डर या छुपा हुआ राज? एक ही चिता पर जलाई गईं चार बच्चियों की लाशें
    ग्रामीणों का कहना है कि परिजनों ने पुलिस के डर से चारों बच्चियों का अंतिम संस्कार चोरी-छिपे कर दिया। मोती बिगहा श्मशान घाट पर एक ही चिता पर चारों शवों को जलाया गया। अंतिम संस्कार के निशान अब भी मौजूद हैं।
    सबसे बड़ा सवाल यह है कि महादलित परिवारों की ये नाबालिग बच्चियां आखिर किस दबाव में थीं? क्या उन्हें किसी ने धमकाया था? क्या वे किसी डर या सामाजिक कारण से परेशान थीं? या फिर कोई ऐसी घटना हुई जिसने उन्हें यह कदम उठाने पर मजबूर कर दिया? घटना गुरुवार की बताई जा रही है, लेकिन रविवार को सामने आने के बाद इलाके में हड़कंप मच गया।
    🔹2022 की घटना की याद दिलाती हसपुरा की त्रासदी, फिर दोहराया गया दर्दनाक इतिहास
    गौरतलब है कि 9 अप्रैल 2022 को रफीगंज प्रखंड के चिरैला गांव में भी छह सहेलियों ने एक साथ जहर खा लिया था, जिसमें पांच की मौत हो गई थी। उस मामले में प्रेम प्रसंग को वजह बताया गया था। हसपुरा की यह घटना प्रशासन ही नहीं, बल्कि समाज के लिए भी चेतावनी है। नाबालिग बच्चियों का इस तरह सामूहिक रूप से आत्मघाती कदम उठाना कई गंभीर सवाल खड़े करता है। फिलहाल पूरे इलाके में खामोशी, डर और दर्द का माहौल है।
    🟢 पुलिस का बयान
    एसडीपीओ अशोक कुमार दास ने कहा कि घटना गंभीर है और हर पहलू से जांच की जा रही है। इलाजरत बच्ची से पूछताछ की जाएगी। परिजन कुछ भी बताने को तैयार नहीं हैं और शवों का अंतिम संस्कार कर दिया गया है। मौत का कारण जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।

  • ‘कोर्ट ने सही किया…’: UGC नियमों पर SC की रोक के बाद नेताओं में मची होड़, जानें किसने बताया इसे जीत और किसने की आलोचना

    ‘कोर्ट ने सही किया…’: UGC नियमों पर SC की रोक के बाद नेताओं में मची होड़, जानें किसने बताया इसे जीत और किसने की आलोचना

    सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी के हालिया नियम के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए रोक लगा दी है. इन याचिकाओं में कहा गया कि आयोग ने जाति-आधारित भेदभाव की गैर-समावेशी परिभाषा अपनाई है. साथ ही कुछ श्रेणियों को संस्थागत संरक्षण से बाहर रखा है. कोर्ट ने नियमों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर केंद्र और यूजीसी को नोटिस जारी किए. कोर्ट के इस फैसले का समाजवादी पार्टी, टीएमसी समेत तमाम दलों ने स्वागत किया है.

    सपा मुखिया अखिलेश यादव ने कहा कि सच्चा न्याय किसी के साथ अन्याय नहीं होता है, कोर्ट यही तय करता है. कानून की भाषा और भाव साफ होना चाहिए. बात सिर्फ नियम नहीं, नीयत की भी होती है. ना किसी का उत्पीड़न हो और ना किसी के साथ अन्याय. ना किसी पर जुल्म-ज्यादती हो और ना किसी के साथ नाइंसाफी. दोषी बचे ना और निर्दोष के साथ अन्याय ना हो.

    ‘…तो हमने 2012 से क्या सीखा?’

    अखिलेश यादव ने कहा कि 2012 में भी रेगुलेशन आए थे. 2026 में नए रेगुलेशंस आए हैं तो हमने 2012 से क्या सीखा? हमारा संविधान कहता है कि हम कहीं भेदभाव नहीं कर सकते. संविधान और तमाम कानून हैं, उसके बावजूद भी भेदभाव और अन्याय होता है,. मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है.

    बसपा मुखिया मायावती का बयान

    बसपा मुखिया मायावती ने कहा, यूजीसी के नए नियमों से सामाजिक तनाव का वातावरण पैदा हो गया. ऐसे हालात में सुप्रीम कोर्ट का यूजीसी के नये नियम पर रोक लगाने का फैसला उचित है. इस मामले में सामाजिक तनाव का वातावरण पैदा ही नहीं होता अगर यूजीसी नए नियम को लागू करने से पहले सभी दलों को विश्वास में लेती.

    यूजीसी की गाइडलाइन असंवैधानिक थी

    इस मामले में टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा, सुप्रीम कोर्ट ने सही किया क्योंकि यूजीसी की गाइडलाइन असंवैधानिक थी. केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा, मैं देश के प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह समेत सभी को धन्यवाद देता हूं. मैं कोर्ट को उसके फैसले के लिए धन्यवाद देता हूं. प्रधानमंत्री ने देश में कभी किसी के साथ भेदभाव नहीं किया. यह प्रधानमंत्री मोदी ही थे जिन्होंने ईडब्ल्यूएस को आरक्षण दिया. हम जैसे लोग सिर्फ अपने देश के लोगों के लिए जीते हैं.

    इस नियम की कोई जरूरत नहीं थी

    यूजीसी गाइडलाइंस पर रोक लगने पर राजस्थान ब्राह्मण महासभा का भी बयान आया है. महासभा के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा, इस नियम की कोई जरूरत नहीं थी. यह साफ है कि यह वोट-बैंक की राजनीति है, जो गलत है. यह जातिवाद. जब तक इसे बढ़ावा देते रहेंगे, असमानता ही बढ़ेगी. सब कुछ पर्दे के पीछे हो रहा है और सिर्फ ऊंची जातियों को दबाया जा रहा है. ऊंची जातियों को समझ आ गया है कि उनके वोट कमजोर हैं, इसीलिए उन्हें दबाया जा रहा है. यह पॉलिसी पूरी तरह गलत है.

    विजय वडेट्टीवार और अजय राज ने क्या कहा?

    कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने कहा, बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा था. केंद्र सरकार कुछ भी करने से पहले सोचती नहीं है. मैं सुप्रीम कोर्ट का आभार व्यक्त करता हूं. अभी रोक लगी है, ये रद्द होना चाहिए. उत्तर प्रदेश कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने कहा, मैं न्यायालय को धन्यवाद देना चाहूंगा. सरकार ने जो समाज में काम किया है ये दुर्भाग्यपूर्ण है. देश सबका है. सभी में समानता है. ऐसा कानून बने जो सभी को समानता से देखे.

  • Short Cut to Wealth: जल्द अमीर बनने के चक्कर में अपराधी बने नाबालिग, साथी के साथ मिलकर डिलीवरी बॉय को लूटा!

    Short Cut to Wealth: जल्द अमीर बनने के चक्कर में अपराधी बने नाबालिग, साथी के साथ मिलकर डिलीवरी बॉय को लूटा!

    गुड़गांव: जल्द अमीर बनने के लिए तीन नाबालिगों ने अपने एक साथी के साथ मिलकर ऐसा कारनामा कर दिया कि अब वह पुलिस की गिरफ्त में पहुंच गए। नाबालिगों ने सामान ऑर्डर कर डिलीवरी बॉय को बुलाया और डिलीवरी बॉय से मारपीट कर उससे बाइक लूट ली। वारदात के बाद आरोपी फरार हो गए। मामले की सूचना मिलते ही पुलिस ने डिलीवरी बॉय की शिकायत पर केस दर्ज कर जांच करते हुए तीन नाबालिगों सहित एक अन्य को काबू कर लिया। आरोपी की पहचान मूल रूप से पश्चिम बंगाल के रहने वाले अब्दुल अमीन के रूप में हुई। आरोपी को सेक्टर-84 से काबू किया गया है।

    आरोपी ने पूछताछ में बताया कि उसने नाबालिगों के साथ मिलकर पूरी वारदात को अंजाम दिया। वह योजना के अनुसार इस बाइक को बेचकर रुपए कमाना चाहते थे। अभी वह बाइक बेच पाते उससे पहले ही पुलिस के हत्थे चढ़ गए। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से लूटी गई बाइक और माेबाइल बरामद किया है। आरोपी अब्दुल अमीन से पूछताछ जारी है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

    आपको बता दें कि 27 जनवरी को एक व्यक्ति ने खेड़की दौला थाना पुलिस को शिकायत दी थी कि वह जोमटो कम्पनी में डिलीवरी बॉय का काम करता है।  25 जनवरी की रात को उसके पास खेड़की दौला सेक्टर-84 से ऑर्डर आया तो यह सेक्टर-82 से ऑर्डर प्राप्त करके सेक्टर-84 ऑर्डर के लिए पहुंचा तो इसके पास ऑर्डर लेने 4 लड़के आए और इसके साथ मारपीट करके इसकी बाइक लूटकर ले गए। मामले में अब पुलिस ने मामले में अब तीन नाबालिगों सहित चार को काबू कर लिया है।

  • Bokaro Love Drama:शोले स्टाइल मोहब्बत! बसंती के लिए विरु चढ़ा टावर पर मचा हड़कम

    Bokaro Love Drama:शोले स्टाइल मोहब्बत! बसंती के लिए विरु चढ़ा टावर पर मचा हड़कम

    🔴 प्यार में वीरू बन गया युवक! 150 फीट मोबाइल टावर पर चढ़ा प्रेमी, पुलिस ने उतारा सुरक्षित
    बोकारो के हरला थाना क्षेत्र स्थित बसंती मोड़ पर उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब प्रेम में डूबा एक युवक डेढ़ सौ फीट ऊंचे मोबाइल टावर पर चढ़ गया। नजारा कुछ ऐसा था कि लोगों को फिल्म शोले का मशहूर सीन याद आ गया, जब वीरू प्यार में बसंती के लिए पानी की टंकी पर चढ़ गया था। मध्य प्रदेश के गुणा जिले के जौहरी गांव का रहने वाला यह युवक चार साल पुराने फेसबुक प्रेम में बोकारो की रहने वाली युवती से बिछड़ने के गम में यह कदम उठा बैठा। पिछले साल दोनों घर से भागकर मध्य प्रदेश चले गए थे, जिसके बाद युवती के परिजनों ने मामला दर्ज कराया। पुलिस युवती को वापस बोकारो ले आई और तभी से युवक अपनी प्रेमिका से जुदाई के दर्द में टूट गया।
    बुधवार शाम युवक बोकारो पहुंचा और अचानक मोबाइल टावर पर चढ़कर आत्महत्या की बात करने लगा। इससे इलाके में हड़कंप मच गया।
    🔴 फेसबुक प्यार, टावर ड्रामा! बोकारो में प्रेमी युवक की हाई-वोल्टेज मोहब्बत, पुलिस ने बचाई जान
    बसंती मोड़ पर लोगों की भीड़ तब जुट गई, जब युवक मोबाइल टावर पर चढ़कर अपनी जान देने की बात करने लगा। हैरानी की बात यह रही कि युवक ने खुद गूगल पर सिटी थाना का नंबर खोजा और फोन कर पूरी घटना की जानकारी दी।
    सिटी थाना प्रभारी सुदामा दास ने तुरंत हरला थाना प्रभारी खुर्शीद आलम को सूचना दी। इसके बाद खुर्शीद आलम ने फोन पर युवक से लंबी बातचीत की और उसे समझाया-बुझाया। करीब आधे घंटे की मशक्कत और भावनात्मक अपील के बाद युवक सुरक्षित नीचे उतर आया। पुलिस की सूझबूझ और संयम से एक बड़ी अनहोनी टल गई। युवक के नीचे उतरते ही मौके पर मौजूद लोगों ने राहत की सांस ली।
    🔴 शोले स्टाइल मोहब्बत! बसंती मोड़ पर टावर चढ़ा प्रेमी, पुलिस की समझदारी से बची जान
    इस अनोखे प्रेम प्रसंग ने पूरे इलाके को कुछ देर के लिए थाम सा दिया। लोग मोबाइल से वीडियो बनाने लगे, कोई प्रार्थना कर रहा था तो कोई पुलिस की कोशिशों पर नजरें टिकाए था। पुलिस का कहना है कि युवक को काउंसलिंग दी जा रही है और उसके परिजनों को भी सूचना दे दी गई है।

  • Latehar News: Chandwa Thana के सरकारी आवास में संदिग्ध मौत, थानेदार के रसोइया का शव बरामद

    थानेदार के सरकारी आवास में रहस्यमयी मौत, आंगन में फंदे से झूलता मिला रसोइया का शव
    लातेहार जिले के चंदवा थाना परिसर से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां पुलिस निरीक्षक सह थानेदार के सरकारी आवास के आंगन में संदेहास्पद परिस्थिति में एक युवक का शव बरामद किया गया। मृतक की पहचान थानेदार के रसोइया (कुक) के रूप में की गई है। शव फंदे से झूलता हुआ पाया गया, जिससे इलाके में हड़कंप मच गया।
    घटना की सूचना मिलते ही दंडाधिकारी समेत वरीय पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई है। फिलहाल यह आत्महत्या है या इसके पीछे कोई और वजह, इस पर से पर्दा उठना बाकी है। पुलिस हर पहलू से मामले की जांच में जुटी हुई है।
    📰 थाने में मौत का सन्नाटा: थानेदार के घर से लटका मिला रसोइया का शव, जांच में जुटी पुलिस
    चंदवा थाना से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। पुलिस निरीक्षक सह थानेदार के सरकारी आवास परिसर में कार्यरत रसोइया का शव संदिग्ध हालत में मिला है।
    शव आंगन में फांसी के फंदे से झूलता मिला, जिसके बाद थाना परिसर में अफरा-तफरी मच गई। दंडाधिकारी की मौजूदगी में शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजने की प्रक्रिया शुरू की गई है। पुलिस का कहना है कि सभी संभावित पहलुओं पर जांच की जा रही है — मानसिक तनाव, पारिवारिक कारण या किसी अन्य दबाव की भूमिका से भी इनकार नहीं किया जा सकता। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के कारणों का स्पष्ट खुलासा हो सकेगा।

  • Jharkhand Breaking: 13 दिन बाद बरामद हुए कैरव गांधी, पुलिस ने पहुंचाया घर

    Jharkhand Breaking: 13 दिन बाद बरामद हुए कैरव गांधी, पुलिस ने पहुंचाया घर

    🟥 13 दिन बाद रहस्य से निकले कैरव गांधी, अपहरण या साजिश? पुलिस की चुप्पी से बढ़ा सस्पें
    जमशेदपुर शहर के चर्चित उद्यमी और एशिया उपाध्यक्ष देवांग गांधी के अपहृत पुत्र व युवा उद्यमी कैरव गांधी को पुलिस ने 13 दिनों बाद सकुशल बरामद कर लिया। मंगलवार सुबह करीब 4:30 बजे पुलिस टीम ने उन्हें सुरक्षित उनके घर पहुंचाया, जिसके बाद परिवार और शहरवासियों ने राहत की सांस ली। 13 जनवरी को कैरव गांधी के अचानक लापता होने से पूरे शहर में सनसनी फैल गई थी। राजनीतिक, सामाजिक और व्यावसायिक हलकों में इस मामले को लेकर लगातार चर्चाएं होती रहीं। रहस्यमयी बात यह रही कि जैसे रहस्यमय तरीके से कैरव लापता हुए थे, ठीक वैसे ही रहस्यमय ढंग से उनकी वापसी हुई। फिलहाल पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, पूरे घटनाक्रम की जांच जारी है और तथ्यों की पुष्टि के बाद ही खुलासा किया जाएगा। दो दिन पूर्व डीजीपी तदाशा मिश्रा का जमशेदपुर पहुंचना और इस मामले की समीक्षा करना भी कई सवाल खड़े कर रहा है। पुलिस पहले इसे रूटीन विजिट बताती रही, लेकिन अब बरामदगी ने पूरे प्रकरण को और रहस्यमय बना दिया है।
    कैरव गांधी की कार पहले ही चांडिल के कांदरबेड़ा इलाके से बरामद की जा चुकी थी। अब पूरे शहर की निगाहें पुलिस और परिवार के आधिकारिक बयान पर टिकी हैं।
    🟢 लापता युवक, बरामद कार और चुप पुलिस… 13 दिन बाद घर लौटे कैरव गांधी
    13 जनवरी को लापता हुए कैरव गांधी को आखिरकार पुलिस ने 14वें दिन सुबह बरामद कर लिया। उनकी सुरक्षित वापसी से परिवार और शहरवासियों में खुशी का माहौल है।
    हालांकि, जिस तरह से यह पूरा मामला सामने आया है, उसने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। पहले उनकी कार कांदरबेड़ा से बरामद होती है, फिर डीजीपी का शहर आना और अब अचानक कैरव की सकुशल वापसी — पूरे घटनाक्रम ने रहस्य की परतें और गहरी कर दी हैं।पुलिस प्रशासन फिलहाल इस मामले पर कुछ भी कहने से बच रहा है। सूत्रों के मुताबिक, बरामदगी से जुड़े हर पहलू की पुष्टि के बाद ही आधिकारिक बयान जारी किया जाएगा।
    कैरव गांधी के लापता होने के बाद उनके परिजनों ने भी सुरक्षित वापसी की अपील की थी। शहर के व्यापारिक वर्ग में इस घटना को लेकर भारी चिंता बनी हुई थी।
    🟢 जमशेदपुर में 13 दिन का सस्पेंस खत्म, सुरक्षित लौटे कैरव गांधी
    जमशेदपुर में पिछले 13 दिनों से चल रहा सस्पेंस आखिरकार खत्म हो गया। चर्चित उद्यमी देवांग गांधी के पुत्र कैरव गांधी को पुलिस ने सकुशल बरामद कर लिया।
    उनकी वापसी से जहां परिवार ने राहत की सांस ली, वहीं पूरे शहर में चर्चा का बाजार गर्म हो गया है कि आखिर वे 13 दिन कहां थे और किन हालातों में उन्हें बरामद किया गया।
    पुलिस ने फिलहाल पूरे मामले को गोपनीय रखा है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही पूरा सच सामने आएगा।

  • High Alert at Gaya Airport:गया एयरपोर्ट पर 25 किलो हाइड्रोपोनिक वीड्स बरामद, थाई फ्लाइट से ड्रग्स तस्करी का भंडाफोड़


    खिलौनों के डिब्बों में छुपा नशे का जाल! गया एयरपोर्ट पर 25 किलो हाइड्रोपोनिक वीड्स बरामद
    गया अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उस वक्त सनसनी फैल गई जब कस्टम्स अधिकारियों ने थाई एयर एशिया की फ्लाइट से आए यात्रियों के सामान की जांच के दौरान 25 किलो हाइड्रोपोनिक वीड्स (मारिजुआना) बरामद किया। तस्करों ने ड्रग्स को खिलौनों के डिब्बों में बड़ी चालाकी से छुपा रखा था, ताकि सुरक्षा एजेंसियों की नजर से बच सकें। कार्रवाई के दौरान 5 यात्रियों को हिरासत में लिया गया है, जिनसे पूछताछ जारी है। गया एयरपोर्ट पर हाई अलर्ट के बीच यह बड़ी सफलता मानी जा रही है।

    🟥 बैंकॉक से गया तक नशे की उड़ान! एयरपोर्ट पर कस्टम्स ने पकड़ी करोड़ों की खेप
    गया एयरपोर्ट पर नशे की तस्करी का बड़ा मामला सामने आया है। बैंकॉक से आई फ्लाइट से उतरते ही एक यात्री के सूटकेस की तलाशी ली गई, जिसमें 8.8 किलो हाइड्रोपोनिक वीड्स बरामद हुआ। इस ड्रग्स की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब 8.8 करोड़ रुपये आंकी गई है। कस्टम्स विभाग ने मादक द्रव्य एवं मनोत्तेजक पदार्थ अधिनियम 1985 (NDPS Act) के तहत ड्रग्स को जब्त कर यात्री को हिरासत में लिया है।

    🟥 एयरपोर्ट फिर बना ड्रग्स तस्करों का निशाना, कस्टम्स ने उड़ाया नशे का खेल
    यह पहली बार नहीं है जब गया एयरपोर्ट पर ड्रग्स की बड़ी खेप पकड़ी गई हो। इससे पहले 29 दिसंबर 2024 को भी यहां तस्करी का प्रयास नाकाम किया गया था।
    ताजा कार्रवाई में थाई एयर एशिया की फ्लाइट से 25 किलो हाइड्रोपोनिक वीड्स जब्त किए गए हैं। जांच एजेंसियों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय गिरोह गया एयरपोर्ट को नया ट्रांजिट प्वाइंट बना रहे हैं। कस्टम्स (निवारण) पटना की यह अब तक की सबसे बड़ी मारिजुआना बरामदगी मानी जा रही है।

  • Hazaribagh Baby Kidnapping News: लक्ष्मी पेट्रोल पंप के पास 3 दिन का नवजात चोरी

    Hazaribagh Baby Kidnapping News: लक्ष्मी पेट्रोल पंप के पास 3 दिन का नवजात चोरी

    डॉक्टर को दिखाने आई मां से छीन लिया 3 दिन का नवजात, हजारीबाग में सनसनी
    हजारीबाग सदर थाना क्षेत्र के लक्ष्मी पेट्रोल पंप के समीप सोमवार को उस वक्त हड़कंप मच गया, जब एक महिला के हाथ से उसका तीन दिन का नवजात शिशु अज्ञात महिला छीनकर फरार हो गई। पीड़िता कटकमसांडी थाना क्षेत्र के बहिमर गांव की निवासी बताई जा रही है, जो अपने नवजात बच्चे को डॉक्टर को दिखाने हजारीबाग आई थी। इसी दौरान एक अज्ञात महिला ने चालाकी से बच्चे को गोद में लिया और देखते ही देखते मौके से फरार हो गई। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। गुस्साए लोगों ने सड़क जाम कर दिया और पुलिस को बुलाने की मांग करने लगे। सूचना मिलते ही सदर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। आसपास लगे CCTV कैमरों की भी जांच की जा रही है।

    🔴 लक्ष्मी पेट्रोल पंप के पास बच्चा चोरी, सड़क जाम कर फूटा लोगों का गुस्सा
    दिनदहाड़े नवजात शिशु के अपहरण की घटना से हजारीबाग शहर दहल उठा। लक्ष्मी पेट्रोल पंप के समीप हुई इस घटना के बाद स्थानीय लोग भड़क उठे और सड़क पर उतर आए।लोगों का कहना था कि अगर प्रशासन समय रहते सक्रिय नहीं हुआ तो ऐसी घटनाएं और बढ़ेंगी। पीड़िता मां का रो-रोकर बुरा हाल है। पुलिस का कहना है कि अज्ञात महिला की तलाश तेज कर दी गई है और जल्द ही मामले का खुलासा किया जाएगा।

    🔴 ममता शर्मसार! 3 दिन के मासूम को लेकर फरार हुई अज्ञात महिला
    ममता को शर्मसार करने वाली यह घटना हजारीबाग सदर थाना क्षेत्र में सामने आई है। नवजात शिशु को लेकर फरार महिला की तलाश के लिए पुलिस की टीम गठित कर दी गई है।घटना के बाद प्रशासन पर सवाल उठ रहे हैं कि भीड़भाड़ वाले इलाके में इस तरह की घटना कैसे हो गई। पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि यदि किसी को संदिग्ध महिला या बच्चे के बारे में कोई जानकारी मिले तो तुरंत सूचना दें।