धर्मेंद्र पटेल । दैनिक स्टेट
कुज्जू बना साइबर ठगी का ट्रांजिट प्वाइंट? मुंबई पुलिस की दबिश में दो गिरफ्तार
कुज्जू/रामगढ़: साइबर अपराध के खिलाफ चल रही कार्रवाई के बीच कुज्जू क्षेत्र का नाम एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। मुंबई पुलिस ने कुज्जू पुलिस के सहयोग से संयुक्त अभियान चलाकर दो लोगों को गिरफ्तार किया है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार मुंबई में हुई साइबर ठगी की लगभग तीन लाख रुपये की रकम गिरफ्तार आरोपियों के बैंक खातों में पहुंची थी। पुलिस मामले की गहन जांच में जुटी है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि रकम केवल उनके खातों तक सीमित थी या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है।
20 प्रतिशत कमीशन का खेल! खाते किराये पर देकर बन रहे ‘साइबर पार्टनर’
जांच से जुड़े सूत्रों का दावा है कि साइबर ठगी करने वाले गिरोह अब सीधे पैसे रखने के बजाय अलग-अलग लोगों के बैंक खातों का इस्तेमाल कर रहे हैं। आरोप है कि ठगी की रकम पहले कई खातों में बांटी जाती है और जिस खाते में पैसा आता है, उसे निकासी के बदले करीब 20 प्रतिशत कमीशन दिया जाता है।
उदाहरण के तौर पर यदि किसी खाते में 3 लाख रुपये आते हैं तो करीब 60 हजार रुपये खातेधारक अपने पास रखता है और शेष राशि गिरोह के सदस्यों तक पहुंचा दी जाती है। इस मॉडल ने साइबर अपराधियों को पकड़ना और भी मुश्किल बना दिया है, क्योंकि पैसा कई स्तरों से होकर गुजरता है।
कुज्जू में सक्रिय है बड़ा साइबर सिंडिकेट? सूत्रों के दावे से बढ़े सवाल
स्थानीय सूत्रों का कहना है कि कुज्जू और आसपास के क्षेत्रों में ऐसे सैकड़ों बैंक खाते सक्रिय हो सकते हैं जिनका उपयोग साइबर अपराधी ठगी की रकम को इधर-उधर करने के लिए कर रहे हैं। बताया जाता है कि रकम खाते में पहुंचते ही संबंधित व्यक्ति को सूचना दे दी जाती है और आधे घंटे के भीतर नकदी निकाल ली जाती है। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन मुंबई पुलिस की कार्रवाई के बाद क्षेत्र में चर्चा तेज हो गई है कि कहीं यह केवल दो लोगों की गिरफ्तारी का मामला नहीं बल्कि एक बड़े नेटवर्क की परतें खुलने की शुरुआत तो नहीं है।
मुंबई पुलिस और कुज्जू पुलिस की संयुक्त कार्रवाई
मुंबई पुलिस और कुज्जू पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान अनिमेष कुमार उर्फ आकाश (29 वर्ष) और गणेश भुईया (32 वर्ष), दोनों निवासी कुज्जू क्षेत्र, जिला रामगढ़ के रूप में हुई है। गिरफ्तारी के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि क्षेत्र में लंबे समय से ऐसे खातों के जरिए साइबर ठगी का पैसा घूम रहा था, तो समय रहते बड़ी कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
सूत्रों के अनुसार स्थानीय स्तर पर इस नेटवर्क की चर्चा पहले से होती रही है। यदि जांच में इन दावों की पुष्टि होती है तो यह मामला केवल दो गिरफ्तारियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि साइबर अपराध की एक बड़ी चेन का खुलासा भी हो सकता है। अब सबकी निगाहें पुलिस जांच और आगे होने वाली गिरफ्तारियों पर टिकी हैं।
🔍 कुज्जू का साइबर सिंडिकेट आखिर कहां तक फैला है? 20% कमीशन और 80% रकम की निकासी की जानकारी किन लोगों को थी? किसके आशीर्वाद से चल रहा है करोड़ों का खेल? नेटवर्क की जमीनी हकीकत, संदिग्ध कड़ियां और पर्दे के पीछे के चेहरे—अगले अंक में

