चतरा के शिवपुर-कठौतिया रेल लाइन निर्माण में 26 करोड़ का राजस्व घोटाला: इरकॉन-राजा कंस्ट्रक्शन के गठजोड़ पर उठे गंभीर सवाल
(दैनिक डेस्क ): चतरा जिले के शिवपुर-कठौतिया रेल लाइन निर्माण परियोजना से जुड़ा कथित खनन घोटाला अब नए मोड़ पर आ गया है। करोड़ों रुपये के राजस्व हेराफेरी, फर्जी स्वामित्व प्रमाण पत्र और सरकारी दस्तावेजों की जालसाजी के इस मामले में मुख्य कार्य एजेंसी इरकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है।
फर्जी स्वामित्व प्रमाण पत्रों का जाल: 16 दस्तावेजों में जालसाजी का खुलासा
जिला खनन पदाधिकारी (डीएमओ) मनोज टोप्पो द्वारा सदर थाना को भेजे गए शिकायत पत्र के अनुसार, मेसर्स राजा कंस्ट्रक्शन (गया, बिहार) ने इरकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड को मिट्टी खनिज के स्वामित्व भुगतान के लिए 16 स्वामित्व प्रमाण पत्र प्रस्तुत किए थे। जांच में ये सभी प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए। बताया जाता है कि ये प्रमाण पत्र जिला खनन कार्यालय के फर्जी लेटरहेड, मोहर, हस्ताक्षर और निर्गत पंजी का इस्तेमाल करके तैयार किए गए थे। कार्यालय के रिकॉर्ड में इनका कोई अस्तित्व नहीं पाया गया।
- कुल मिट्टी उठाव का दावा: 45 लाख 50 हजार घन मीटर
- कथित फर्जी प्रमाण पत्र: 16
- अनुमानित राजस्व हानि: लगभग 26 करोड़ रुपये से अधिक
खनन विभाग के पत्रों की अनदेखी: इरकॉन ने दो साल तक नहीं दिया जवाब
जिला खनन कार्यालय ने इरकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड के मुख्य महाप्रबंधक (CGM) मोहन वत्स को कई बार ईमेल और पत्र लिखे, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। पत्राचार का कालक्रम:
- पत्रांक 424 — दिनांक 26 अप्रैल 2024
- पत्रांक 425 — दिनांक 26 अप्रैल 2024
- पत्रांक 684 — दिनांक 24 जून 2024
- पत्रांक 1195 — दिनांक 06 नवंबर 2024
- पत्रांक 177 — दिनांक 04 फरवरी 2025
ईमेल आईडी: dmo-chatra@jharkhandmail.gov.in से mohanvatsa@ircon.org और crcp.2071@ircon.org पर पत्राचार किया गया।डीएमओ मनोज टोप्पो ने कहा:“कार्यालय के आधिकारिक पत्राचार की अनदेखी करते हुए फर्जी स्वामित्व प्रमाण पत्रों के आधार पर भुगतान किए जाने से राजस्व हेराफेरी हुई है।”
घोटाले का पैमाना: अगस्त 2023 से जुलाई 2025 तक फैला है फर्जीवाड़ा
जांच में सामने आया है कि यह पूरा फर्जीवाड़ा अगस्त 2023 से लेकर जुलाई 2025 तक फैला हुआ है। इस दौरान लगातार फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भुगतान की प्रक्रिया जारी रही। खनन विभाग के अनुसार, उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर फर्जीवाड़े की अनुमानित वित्तीय राशि लगभग 26 करोड़ रुपये से अधिक हो सकती है। विभाग का मानना है कि यह केवल राजस्व हानि का मामला नहीं, बल्कि सरकारी अभिलेखों की जालसाजी और संस्थागत धोखाधड़ी का गंभीर प्रकरण है।
विशेषज्ञों का अनुमान है कि पुलिस जांच के साथ यह आंकड़ा बढ़कर अप्रत्याशित स्तर को छू सकता है।
मुख्य ठेकेदार राजा कंस्ट्रक्शन पर फर्जी चालान के जरिये 26 करोड़ की हेराफेरी का आरोप
आरोप क्या हैं?
- मेसर्स राजा कंस्ट्रक्शन को इरकॉन द्वारा पेटी कॉन्ट्रैक्ट पर मिट्टी उठाव का काम दिया गया था।
- कंपनी ने 45 लाख 50 हजार घन मीटर मिट्टी के उठाव के बाद रॉयल्टी भुगतान से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत किए।
- जांच में पाया गया कि ये दस्तावेज़ जिला खनन कार्यालय से निर्गत ही नहीं हुए थे।
- फर्जी लेटरहेड, मोहर, हस्ताक्षर और निर्गत पंजी का इस्तेमाल कर प्रमाण पत्र तैयार किए गए।
इरकॉन ने दर्ज कराई एफआईआर:
हेराफेरी के खुलासे के बाद इरकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड ने राजा कंस्ट्रक्शन के विरुद्ध सदर थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई। हालांकि, डीएमओ मनोज टोप्पो का कहना है: “कथित फर्जीवाड़े के खुलासे के बाद कार्रवाई के डर से स्वयं को बचाने के उद्देश्य से इरकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड ने राजा कंस्ट्रक्शन के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराई है।”
इरकॉन की भूमिका पर गंभीर सवाल: मिलीभगत या संस्थागत लापरवाही?
मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि जब खनन विभाग लगातार दस्तावेजों के सत्यापन की मांग कर रहा था, तब इरकॉन ने मामले को गंभीरता से क्यों नहीं लिया? प्रमुख प्रश्न:
- इरकॉन ने राजा कंस्ट्रक्शन द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों का सत्यापन क्यों नहीं कराया?
- खनन विभाग के पांच पत्रों और अनेक ईमेल का जवाब दो वर्षों तक क्यों नहीं दिया गया?
- बिना पर्याप्त सत्यापन के राजा कंस्ट्रक्शन को करोड़ों का भुगतान क्यों जारी रखा गया?
- इरकॉन और राजा कंस्ट्रक्शन के बीच किसी प्रकार की मिलीभगत तो नहीं थी?
जिले में अब इरकॉन-राजा कंस्ट्रक्शन गठजोड़ की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच की मांग तेज हो गई है। एक वरिष्ठ पत्रकार ने कहा:“इरकॉन ने खनन विभाग के पत्रों को नजरअंदाज किया और बिना सत्यापन के भुगतान जारी रखा। यह संस्थागत लापरवाही या मिलीभगत का संकेत हो सकता है।”
पुलिस जांच जारी, प्रशासन भी सक्रिय — हर हाल में होगी राजस्व की वसूली
पुलिस की कार्रवाई: सदर थाना प्रभारी सह पुलिस निरीक्षक अवधेश सिंह ने बताया: “रेलवे लाइन निर्माण कार्य में लगी मेसर्स इरकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड की शिकायत पर राजा कंस्ट्रक्शन के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। खनन विभाग की ओर से भी पत्र प्राप्त हुआ है। दस्तावेजों की सत्यता, संबंधित एजेंसियों की भूमिका और वित्तीय लेन-देन सहित सभी बिंदुओं की गहन जांच की जा रही है।”
खनन विभाग की सख्ती: डीएमओ मनोज टोप्पो ने स्पष्ट कहा:“यदि जांच में राजस्व क्षति की पुष्टि होती है तो संबंधित एजेंसियों से हर हाल में उसकी वसूली सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।”
एक बड़े घोटाले का पर्दाफाश
यह मामला अब सिर्फ राजा कंस्ट्रक्शन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इरकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड की जवाबदेही भी इसके केंद्र में आ गई है। यदि जांच में खनन विभाग द्वारा लगाए गए आरोप सही साबित होते हैं, तो यह चतरा जिले के इतिहास का सबसे बड़ा चालान और राजस्व घोटाला साबित हो सकता है।अब सबकी निगाहें पुलिस जांच और प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं।
