प्यार पर भड़का भाई का कहर!
— “प्रेम विवाह मत करो!” यह बात बहन के कानों तक नहीं पहुँची, और अब बहुत देर हो गई
नवादा जिले में एक बेहद दर्दनाक घटना हुई है। 21 साल की दिव्या नाम की एक लड़की थी, जो नालंदा के गिरियक गांव से थी। दिव्या को एक लड़के से प्यार हुआ — यह प्यार इतना गहरा था कि उसने पानीपत जाकर अपने मन के आदमी से शादी कर ली। शादी हुई, खुशियाँ मनाई गईं, लेकिन… परिवार को यह बात बिल्कुल पसंद नहीं आई! परिवार वालों ने दिव्या को घर बुला लिया। घर लौटते ही क्या हुआ? उसका अपना सगा भाई मनीष कुमार बिफर गया! उसे यह “प्रेम विवाह” बिल्कुल बर्दाश्त नहीं हुआ। घर में एक तरफ दिव्या थी जो अपने प्यार की खुशी में डूबी थी, और दूसरी तरफ मनीष था जो घिनौने शब्दों से भरा हुआ था। दोनों के बीच जोरदार झगड़ा और बहस हुई। भाई गुस्से में आग बन गया। पर यहीं बहस रुक जानी चाहिए थी… लेकिन नहीं! मनीष के मन में कुछ और ही पल रहा था। वह सोच रहा था कि अगर दिव्या ज़िंदा रहेगी, तो परिवार की “इज्जत” चली जाएगी। और इसी सोच ने उसे एक खतरनाक कातिल में बदल दिया! डैम में फेंका गया शव, पर सच छिप नहीं सका 🌊🔍
— 11 जून को मिला शव, 18 जून को गिरफ्तारी — पुलिस को सिर्फ 7 दिन का समय लगा सच्चाई निकालने में
11 जून की सुबह नवादा के ताराकोल डैम के पास कुछ लोगों को पानी में एक लाश दिखाई दी। पुलिस को खबर मिली तो वह दौड़ी-दौड़ी आई। लाश को बाहर निकाला गया — यह दिव्या ही थी! पर दिव्या कैसे डैम में पहुँची? यही रहस्य था। पुलिस ने पोस्टमार्टम करवाया। डॉक्टर की रिपोर्ट आई — हत्या! यानी दिव्या को किसी ने मारा था। अब सवाल उठा: कौन? पुलिस ने परिवार से सवाल-जवाब शुरू किया। माता-पिता, भाई-बहन… सब से पूछा गया।और तभी… सच सामने आने लगा! पुलिस को पता चला कि घर में हाल ही में प्रेम विवाह को लेकर भयंकर झगड़ा हुआ था। और यह झगड़ा दिव्या के अपने भाई मनीष के साथ था! यह तो साफ लिख गया कि मनीष ही दोषी है। पर मनीष ने शव को डैम में फेंककर सबूत मिटाने की सोची था।
पकड़ा गया! कबूली भी, जेल भी! 🚔⛓️
— एसपी ने 7 दिन में राज खोल दिया, और ढूंढ निकाले एक कट्टा-कारतूस भी!
18 जून को गुरुवार नवादा के पुलिस अधीक्षक अभिनव धीमान ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई। सारे पत्रकार इकट्ठा हुए। एसपी साहब ने कहा — “हमने दोषी को पकड़ लिया है!”दोषी कौन था? मनीष कुमार — दिव्या का अपना भाई! पुलिस की स्पेशल टीम ने तकनीकी साक्ष्यों, गुप्त सूचनाओं, और बुद्धिमानी से काम लेते हुए मनीष को गुललियातारी गांव से धर दबोचा।पूछताछ शुरू हुई। मनीष के मुँह से एक-एक शब्द निकाला गया। और अंत में… मनीष ने सब कुछ मान लिया! उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया कि हाँ, मैंने ही अपनी बहन को मार डाला!
लेकिन यहाँ एक सरप्राइज और भी था!
जब पुलिस ने मनीष के यहाँ छापेमारी की, तो क्या मिला? सिर्फ हत्या के सबूत नहीं, बल्कि एक देसी कट्टा (पिस्तौल) और 3 जिंदा कारतूस भी! यानी मनीष के पास अवैध हथियार भी थे। इसलिए पुलिस ने दो अलग-अलग मुकदमे दर्ज किए
आखिरी बात:
प्यार करना कोई गुनाह नहीं है। प्यार को सज़ा देना ही असली गुनाह है। दिव्या प्यार करती थी — बस यही उसका “जुर्म” था। और इस जुर्म की कीमत उसने अपनी जान से चुका दी।

