सिरका खदान हादसे पर बरसे बाबूलाल मरांडी, बोले— एक को बचाने की कोशिश में गई चार जानें
हादसे के पीछे लापरवाही का आरोप, समय पर पहुंचती रेस्क्यू टीम तो बच सकती थीं जानें
रामगढ़ के सिरका क्षेत्र में बंद पड़ी खदान में जहरीली गैस रिसाव से हुई चार लोगों की मौत के मामले में झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पीड़ित परिवारों से मुलाकात के बाद उन्होंने कहा कि यह हादसा केवल दुर्घटना नहीं बल्कि लापरवाही का नतीजा है। मरांडी के अनुसार बंद परी खदान में अचानक एक व्यक्ति के गिर जाने के बाद उसको बचाने के प्रयास में अन्य लोग खदान में उतरे और देखते ही देखते चार लोगों की जान चली गई। उन्होंने दावा किया कि घटना की सूचना मिलने के बावजूद सीसीएल की रेस्क्यू टीम करीब दो घंटे बाद पहुंची। उनका कहना था कि किसी भी गैस हादसे में शुरुआती कुछ मिनट सबसे महत्वपूर्ण होते हैं और समय पर बचाव कार्य शुरू होता तो कुछ लोगों की जान बचाई जा सकती थी।
बंद खदानें बनीं मौत का जाल, सीसीएल से मांगी सुरक्षा घेराबंदी
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि सिरका समेत कोयलांचल क्षेत्र में कई ऐसी परित्यक्त और बंद कोयला की खदानें हैं, जहां स्थानीय लोगों का आना-जाना बना रहता है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन खतरनाक स्थानों की पर्याप्त घेराबंदी नहीं होने से हादसों का खतरा लगातार बना हुआ है। मरांडी ने सीसीएल प्रबंधन से मांग की कि सभी बंद खदानों की तत्काल पहचान कर उनके चारों ओर मजबूत घेराबंदी और चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं। उन्होंने कहा कि प्रशासन और खनन कंपनियों की जिम्मेदारी केवल कोयला उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी है। यदि समय रहते सुरक्षा उपाय किए गए होते तो सिरका जैसी त्रासदी शायद टाली जा सकती थी।
अस्पताल भूमिका पर भी उठाए सवाल
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने घटना के बाद की प्रशासनिक कार्रवाई पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि यदि बेहतर इलाज की उम्मीद में परिजन रांची ले जाना चाहते थे तो प्रशासन को सहयोग करना चाहिए था। परिजनों की भावनाओं और उम्मीदों का सम्मान किया जाना चाहिए था। उन्होंने कहा कि ऐसे संवेदनशील मामलों में प्रशासन को नियमों के साथ मानवीय दृष्टिकोण भी अपनाना चाहिए, ताकि पीड़ित परिवारों को अतिरिक्त मानसिक पीड़ा न झेलनी पड़े।
रेस्क्यू के नाम पर पैसे लेने का आरोप, जांच की उठी मांग
मरांडी ने सीसीएल की रेस्क्यू व्यवस्था पर सबसे गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें जानकारी मिली है कि बचाव कार्य के दौरान रेस्क्यू के लिए पांच हजार रुपये लिए गए। उन्होंने कहा कि यदि यह आरोप सही है तो यह बेहद अमानवीय और शर्मनाक है। किसी आपदा में फंसे लोगों को बचाने के बजाय उनसे या उनके परिजनों से पैसे मांगना मानवता के खिलाफ है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की। मरांडी ने कहा कि सिरका खदान हादसे ने न केवल सुरक्षा व्यवस्था बल्कि बचाव तंत्र और प्रशासनिक संवेदनशीलता पर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं ।
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Sunday, June 14

