जोरिया नदी बंद होने से जन्मा संकट – हजारों घरों में पानी की कमी
दैनिक स्टेट डेस्क । धनबाद के सोनारडीह क्षेत्र में बहियारडीह की बंद खदान से महीनों से अवैध कोयले की निकासी जारी थी। इसी अवैध खनन प्रक्रिया में क्षेत्र की जीवनदायी जलधारा “जोरिया नदी” को पूरी तरह सीमेंट, बालू और औद्योगिक कचरे से बंद कर दिया गया। इस नदी पर जोगिडीह और बहियारडीह के लगभग 5,000 परिवार पूरी तरह निर्भर हैं। नदी बंद होने के बाद से गर्मी के दिनों में हजारों घरों में पानी की भीषण कमी हो गई। बुजुर्ग, बच्चों और महिलाओं को दूर-दूर से पानी लाना पड़ने लगा। कुएं सूख गए, हैंडपंप निष्क्रिय हो गए और सार्वजनिक नल भी दिनभर सूखे रहने लगे। स्वास्थ्य विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि इस तरह की स्थिति में वॉटरबोर्न डिजीज का खतरा बढ़ जाता है।
ग्रामीणों का साहसिक कदम – जलधारा खोलने के लिए निकली महिलाओं की सेना
बीसीसीएल (बिहार कोल लिमिटेड) एरिया-3 और सीआईएसएफ द्वारा दो महीने पहले 40 टन अवैध कोयला जब्त किया गया था, लेकिन सरकारी तंत्र ने बंद की गई जलधारा को पुनः खोलने में कोई पहल नहीं की। इसी लापरवाही से तंग आकर मंगलवार की सुबह बहियारडीह के ग्रामीण, विशेष रूप से महिलाएं, जलधारा को खोलने के लिए खदान क्षेत्र की ओर निकल पड़े। महिलाओं की यह टीम पानी के अधिकार के लिए लड़ाई लड़ने को दृढ़ संकल्प थी। सैकड़ों महिलाएं अपने बर्तन और औजार लेकर खदान इलाके में पहुंचीं। स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. राज कुमार सिंह के अनुसार, “यह ग्रामीणों का जीवन रक्षक अभियान था, न कि कोई अराजक कार्यवाही।” महिलाओं ने शांतिपूर्ण तरीके से जलधारा को खोलने का प्रयास किया और अपनी मांग को दोहराया कि सरकार तुरंत जोरिया नदी को पुनः जीवंत करे।
तस्करों का बर्बर हमला – निहत्थे ग्रामीणों पर बरसी गोलियां और बम
जब ग्रामीण जलधारा को खोलने का काम शुरू ही कर रहे थे, तो अवैध कोयला तस्करी से जुड़े संगठित गिरोह ने सीधा हमला बोल दिया। एक साक्षी के अनुसार, “सुबह 8 बजे के करीब 100 से अधिक सशस्त्र लोग आसपास की झाड़ियों से निकल आए। उन्होंने पहले चेतावनी भी नहीं दी, सीधे ही गोलियां चलानी शुरू कर दीं।” दर्जनों बम फोड़े गए, असंख्य गोलियां चलाई गईं और पत्थरबाजी भी की गई। गुड़िया देवी, एक 45 वर्षीय महिला को गोली लगी। रमेश साव (38) को सिर में चोट आई। युवा लड़की प्रिया कुमारी के पैर में गंभीर चोट आई। कुल आधा दर्जन से अधिक लोग घायल हो गए। गांव के स्कूल शिक्षक अमित कुमार बताते हैं, “यह एक नियोजित हमला था। तस्करों को पता था कि ग्रामीण कब और कहां आएंगे।”
पुलिस की दोहरी मार – ग्रामीण विरोध के बाद लाठीचार्ज और गिरफ्तारियां
घायलों को देखकर ग्रामीणों का आक्रोश चरम पर पहुंच गया। सोनारडीह ओपी पर पहुंचकर उन्होंने पुलिस से शिकायत दर्ज कराने की मांग की। लेकिन बजाय शिकायत दर्ज करने के, पुलिस ने ग्रामीणों को “अराजक तत्व” करार दिया और लाठीचार्ज कर दिया। कई महिलाओं को पुलिस की लाठियों से चोटें आईं। इसके बाद जब हालात और गर्म हुए, तो पुलिस ने दो युवकों को हिरासत में ले लिया। पुलिस सूत्रों के अनुसार, उन पर “सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने” का आरोप लगाया गया, हालांकि तस्करों द्वारा किए गए हमले की जांच अभी तक शुरू नहीं हुई है। मानवाधिकार कार्यकर्ता पूजा शर्मा कहती हैं, “यह एक विडंबना है कि जो लोग पानी के अधिकार के लिए लड़ रहे थे, उन्हें ही पुलिस ने दमित किया। असली अपराधी (तस्कर) अभी तक पकड़े नहीं गए।” फिलहाल पूरे बहियारडीह में तनाव का माहौल है और भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।

