नवादा से गिरिडीह तक बिछेगी विकास की ‘लोहे की लकीर’”
बिहार और झारखंड के लाखों लोगों के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। वर्षों से फाइलों में अटकी नवादा-गिरिडीह नई रेल लाइन परियोजना अब जमीन पर उतरने की दिशा में बढ़ती दिख रही है। रेलवे मंत्रालय ने इस बहुप्रतीक्षित रेल लाइन के एलाइनमेंट और प्रारंभिक इंजीनियरिंग-सह-यातायात सर्वे को मंजूरी देकर उम्मीदों की रफ्तार तेज कर दी है। करीब 130 किलोमीटर लंबी यह लाइन नवादा से सतगावां, गावां, तिसरी होते हुए गिरिडीह तक पहुंचेगी। सबसे दिलचस्प बात यह है कि भविष्य में इसे पारसनाथ क्षेत्र से जोड़ने की भी संभावना है। यानी यह रेल लाइन सिर्फ ट्रैक नहीं, बल्कि पर्यटन, व्यापार और रोजगार की नई कहानी लिख सकती है।
“दिल्ली-मुंबई जाने वालों की कटेगी टेंशन! अब कोडरमा नहीं, सीधे गिरिडीह से मिलेगी रेल राहत?”
गिरिडीह और आसपास के ग्रामीण इलाकों के लोगों के लिए यह परियोजना किसी सपने से कम नहीं मानी जा रही। अभी तक दिल्ली, मुंबई या बड़े शहरों की ट्रेन पकड़ने के लिए लोगों को कोडरमा तक लंबा सफर तय करना पड़ता है, लेकिन नई रेल लाइन बनने के बाद तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है। गया से सीधा रेल संपर्क मिलने की संभावना ने लोगों की उम्मीदें बढ़ा दी हैं। खासकर गावां, तिसरी और देवरी जैसे इलाकों के लोगों को सबसे ज्यादा फायदा होगा। छात्रों, नौकरीपेशा लोगों और व्यापारियों के लिए सफर आसान होने के साथ समय और खर्च दोनों में बड़ी राहत मिल सकती है। गांवों की दूरी अब विकास की रफ्तार नहीं रोक पाएगी।
“रेल लाइन नहीं, ग्रामीण इलाकों की नई लाइफलाइन! अब पिछड़े गांवों में भी दौड़ेगी तरक्की”
प्रस्तावित नवादा-गिरिडीह रेल परियोजना को ग्रामीण विकास का ‘गेम चेंजर’ माना जा रहा है। जिन इलाकों तक अब तक सिर्फ खराब सड़कें और लंबा सफर पहुंचता था, वहां पहली बार रेल की सीटी सुनाई दे सकती है। रेलवे मंत्रालय ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में प्रारंभिक सर्वे के लिए 2.67 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। सर्वे के बाद डीपीआर तैयार होगी और फिर आगे निर्माण का रास्ता साफ होगा। इस रेल लाइन से छोटे व्यापारियों को बड़े बाजार मिलेंगे, किसानों को माल भेजने में सहूलियत होगी और युवाओं के लिए रोजगार व शिक्षा के नए दरवाजे खुल सकते हैं। लोगों का कहना है कि अगर यह परियोजना पूरी हुई, तो गांवों की किस्मत की पटरी भी बदल जाएगी।

