108 एंबुलेंस सेवा खुद ICU में! हजारीबाग-चतरा में मरीजों की जिंदगी भगवान भरोसे
कागजों में दौड़ रही सेवा, सड़कों पर दम तोड़ रहीं एंबुलेंस
हजारीबाग और चतरा में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवा की रीढ़ मानी जाने वाली डायल 108 एंबुलेंस व्यवस्था गंभीर संकट से गुजर रही है। जिस सेवा का उद्देश्य दुर्घटना, प्रसव और गंभीर बीमारियों के दौरान लोगों को समय पर अस्पताल पहुंचाना है, वही सेवा अब खुद वेंटिलेटर पर नजर आ रही है। हजारीबाग में करीब 18 से 20 लाख आबादी के लिए 23 एंबुलेंस दर्ज हैं, लेकिन इनमें से 6 पूरी तरह बंद पड़ी हैं। केवल 17 वाहन किसी तरह संचालन में हैं। कई एंबुलेंस इतनी पुरानी हो चुकी हैं कि उनके स्पेयर पार्ट्स तक बाजार में उपलब्ध नहीं हैं। नतीजा यह है कि मरीजों के परिजनों को निजी वाहनों और महंगी एंबुलेंस सेवाओं का सहारा लेना पड़ रहा है।
सांसद-विधायक निधि से खरीदी गाड़ियां बनीं कबाड़, करोड़ों का निवेश बेअसर
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि जनप्रतिनिधियों की निधि से खरीदी गई लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस भी आज अस्पताल परिसरों में जंग खाती दिखाई दे रही हैं। हजारीबाग में कई वाहन 2016 मॉडल के हैं और तीन लाख किलोमीटर से अधिक की दूरी तय कर चुके हैं। लगातार उपयोग और समय पर रखरखाव नहीं होने के कारण ये गाड़ियां अब तकनीकी रूप से जवाब दे रही हैं। स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड में वाहन मौजूद हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर उनका लाभ मरीजों तक नहीं पहुंच रहा। ग्रामीण इलाकों में स्थिति और भी खराब है, जहां मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाने के लिए ट्रैक्टर, ऑटो या निजी कारों का सहारा लेना पड़ता है।
चतरा में 108 सेवा की सांसें उखड़ीं, एक एंबुलेंस के भरोसे सदर अस्पताल
चतरा जिले की तस्वीर भी कम भयावह नहीं है। जिले में कुल 18 एंबुलेंस हैं, लेकिन आधे से अधिक खराब या सीमित क्षमता में चल रही हैं। चतरा सदर अस्पताल में 108 सेवा की चार एंबुलेंस उपलब्ध हैं, जिनमें से तीन पूरी तरह कबाड़ बन चुकी हैं। एकमात्र संचालित वाहन के टायर तक जर्जर हो चुके हैं। वहीं मरीजों की सुविधा के लिए उपलब्ध कराई गई तीनों 104 एंबुलेंस भी लंबे समय से खराब पड़ी हैं। इटखोरी, सिमरिया, गिद्धौर, प्रतापपुर और लावालौंग की एंबुलेंस पूरी तरह बंद हो चुकी हैं। कई अन्य वाहन केवल 20 से 30 किलोमीटर तक ही चल पा रहे हैं। ऐसे में गंभीर मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाना स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
गाड़ी उपलब्ध नहीं है’ सुनकर लौटते मरीज, विभाग ने सुधार का दिया भरोसा
मरीजों और उनके परिजनों का आरोप है कि आपात स्थिति में 108 नंबर पर कॉल करने के बावजूद समय पर एंबुलेंस नहीं मिलती। कई बार “गाड़ी उपलब्ध नहीं है” या “रास्ते में है” जैसे जवाब मिलते हैं, जिससे मरीजों की हालत और गंभीर हो जाती है। गरीब परिवारों को निजी एंबुलेंस पर हजारों रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। इस पूरे मामले पर हजारीबाग और चतरा के स्वास्थ्य अधिकारियों ने माना है कि कई वाहन खराब हैं। हजारीबाग के सिविल सर्जन ने बताया कि खराब एंबुलेंसों की सूची तैयार कर नई गाड़ियों की मांग की गई है। वहीं चतरा के सिविल सर्जन डॉ. सत्येंद्र कुमार सिन्हा ने कहा कि विभाग को मरम्मत और नई व्यवस्था के लिए पत्र भेजा गया है तथा जल्द सुधार की प्रक्रिया शुरू होगी। अब सवाल यह है कि जब जीवन बचाने वाली एंबुलेंस ही समय पर नहीं पहुंचेगी, तो आपातकाल में मरीजों की जान की जिम्मेदारी आखिर कौन लेगा?
Ambulance Service on Life Support: Healthcare Emergency Deepens in Jharkhand
The emergency healthcare system in Jharkhand is facing a serious crisis as the 108 ambulance service in Hazaribagh and Chatra districts struggles with a severe shortage of functional vehicles. Several ambulances have become unusable due to age, poor maintenance, and mechanical failures, leaving patients and their families in distress during emergencies.
In Hazaribagh, only 17 out of 23 ambulances are operational, while the rest remain off the roads. The situation is equally alarming in Chatra, where more than half of the 18 ambulances are either completely broken down or running in poor condition. Many patients reportedly wait for hours after calling the emergency helpline and are often forced to hire expensive private vehicles to reach hospitals.
Health officials have acknowledged the problem and said proposals for repairs and new ambulances have been sent to the concerned department. Residents now hope for immediate action before more lives are put at risk.
