घाटों-पतरातू-कुज्जू बना हॉटसीट ? सरायकेला तक लग रहे है दौड़ ? रामगढ पुलिस महकमे में इन दिनों नए साहब के आने के बाद चर्चा का बाजार गर्म है कि कई थानेदार को हटाया जाने या उनके जगह दूसरी पुलिस कर्मी को बिठाए जाने की चर्चा पुलिस महकमे में जोड़ों पर है जिसके बाद अप्रत्यक्ष रूप से “कुर्सी युद्ध” शुरू हो चुकी है थानेदार लीग ने रामगढ़ सरायकेला के बीच की दूरी कम कर दी है पुलिस महकमा से लेकर चाय दुकानों तक बस यही चर्चा है कि आखिर किसकी जुगलबंदी रंग लाएगी। दिलचस्प बात यह है जिन चेहरों को कभी सरकारी बैठकों में नहीं देखा गया, वे भी अब “दरबार दर्शन” में सक्रिय बताए जा रहे हैं। हालांकि अंतिम फैसला कप्तान को कारना है लेकिन अंदरखाने हर कोई खुद को “फाइनल लिस्ट” में मानकर चल रहा है।हालात यह है कि पुलिस कर्मी सरायकेला पहुंच अपने अपने कामों का बखान कर रहे है ताकि उनके कार्यों को कप्तान तक पहुंचाया जा सके और उन्हें मनचाहा पोस्टिंग मिल सके सूत्र बताते है कि तीन की तिकड़ी इस रेस में आगे चल रहा है चौक चौराहे पर बीच चर्चा है सूत्र की माने तो जिले के हॉट सीट के प्रमुख दावेदार पाण्डेय जी की नजर घाटों थाना पर बताई जा रही है, यादव जी की नजर पतरातू की कुर्सी साधने में है। जबकि विकाश का बहाना बना विकाश कुज्जू थाने को साधने में जुटा है
ऐसे कई और भी है जो अपने अपने हिसाब से अपनी अपनी गोटी सेट करने की जुगाड में है। एसपी मुकेश कुमार के सख्त तेवर से बढ़ी बेचैनी, एक गलती और सीधा साइडलाइन! एसपी मुकेश कुमार लुनायत के सख्त रवैये ने पूरे पुलिस महकमे की नींद उड़ा दी है। जिले में साफ संदेश है कि अब काम में लापरवाही, फरियादियों की अनदेखी या अपराध पर नरमी किसी भी अधिकारी को सीधे साइडलाइन कर सकती है। यही वजह है कि थानों का माहौल अचानक बदला बदला सा है थाना परिसर में फरियादी के साथ व्यवहार में नरमी उन्हें और कार्य के फरियादी के प्रति संवेदनशीलता देखी जा रही है लेकिन इन सबों के बीच थानेदारों के चेहरे पर मुस्कान कम और तनाव ज्यादा दिख रहा है। वजह साफ है—जिले के कप्तान की नजर हर गतिविधि पर बताई जा रही है।महकमे में चर्चा है कि कुछ अधिकारी पोस्टिंग से ज्यादा “परफॉर्मेंस रिपोर्ट” को लेकर परेशान हैं। क्योंकि उन्हें मालूम है कामकाज का रिकॉर्ड ही उन्हें कुर्सी तक ले जाएगा यही वजह है हर कोई अपनी अपनी फाइलों और अपराध आंकड़ों को चमकाने में जुट गए हैं। लेकिन सवाल वही है—क्या पोस्टिंग की राजनीति इस सख्ती पर भारी पड़ेगी?आखिर किसकी चलेगी—? जिले के पुलिस महकमे में इन दिनों वर्दी से ज्यादा “पोस्टिंग की पटकथा” चर्चा में है। घाटों, पतरातू और कुज्जू थाना को लेकर चल रही अंदरूनी रस्साकशी अब खुली फुसफुसाहट बन चुकी है। कुछ दावेदार अपनी पुरानी उपलब्धियों का बखान कर रहे हैं तो कुछ “ऊपर तक पहुंच” का दावा कर रहे हैं। मजेदार बात यह है कि जिन अधिकारियों को कभी फील्ड में वक्त नहीं मिलता था, वे अब लगातार यात्राओं में व्यस्त बताए जा रहे हैं। महकमे में कटाक्ष चल रहा है—“अपराध कम हो या न हो, लेकिन सरायकेला का ट्रैफिक जरूर बढ़ गया है।”
हालांकि पूरे खेल में सबसे बड़ा फैक्टर एसपी मुकेश कुमार की सख्ती मानी जा रही है। क्योंकि कप्तान का साफ संदेश है कि काम नहीं तो कुर्सी नहीं। ऐसे में पैरवी की राजनीति और परफॉर्मेंस की हकीकत के बीच असली मुकाबला शुरू हो चुका है।
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Monday, May 11

