बोकारो Master Data Scam SP Account से 16 करोड़ का ‘डिजिटल खेल’, सिस्टम में सेंध की शुरुआत
बोकारो में सरकारी सिस्टम की जड़ें हिला देने वाला एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक पारदर्शिता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। कहानी की शुरुआत होती है कर्मचारियों के बेहद संवेदनशील ‘इंप्लाइज मास्टर डेटा’ से, जहां पहली नजर में सब कुछ सामान्य दिखता है, लेकिन अंदर ही अंदर एक बड़ा खेल चल रहा था। महालेखाकार (AG) की जांच में खुलासा हुआ कि बोकारो एसपी के नाम से खुले एक बैंक खाते का अवैध इस्तेमाल कर करीब 15.98 करोड़ रुपये की निकासी की गई।
मई 2017 से नवंबर 2025 तक कुल 271 ट्रांजेक्शन के जरिए यह रकम धीरे-धीरे सिस्टम से बाहर निकाली गई, ताकि किसी को शक न हो। यात्रा भत्ता, जीएसटी और वन कार्य जैसे अलग-अलग मदों का इस्तेमाल कर पैसों को ‘वैध’ दिखाने की कोशिश की गई। हैरानी की बात यह रही कि इस एक खाते को 14 अलग-अलग GPF नंबरों से जोड़ दिया गया, जिनमें से अधिकांश असली कर्मियों के नहीं थे। जब जांच की आहट तेज हुई, तो जनवरी 2026 में इस खाते को मास्टर डेटाबेस से ही डिलीट कर दिया गया, ताकि सबूत मिट जाएं। यहीं से यह साफ हो गया कि यह सिर्फ वित्तीय गड़बड़ी नहीं, बल्कि एक सुनियोजित डिजिटल साजिश की शुरुआत थी, जिसका अगला चरण और भी खतरनाक था।
बोकारो Master Data Scam : 2175 कर्मचारियों की उम्र में खेल, नौकरी बढ़ाने का ‘डेटा मैनिपुलेशन’ नेटवर्क उजागर
पहले चरण में सामने आए वित्तीय घोटाले के बाद जब महालेखाकार ने गहराई से जांच शुरू की, तो कहानी और भी चौंकाने वाली हो गई। अब खुलासा हुआ कि इस पूरे खेल का दूसरा मकसद कर्मचारियों को लंबे समय तक नौकरी में बनाए रखना था। जनवरी 2023 और जनवरी 2026 के डेटा की तुलना में पाया गया कि कुल 2175 कर्मचारियों की जन्म तिथि में छेड़छाड़ की गई है। इनमें से 1072 मामलों में उम्र को एक दिन से लेकर 40 साल तक पीछे कर दिया गया, जिससे कर्मचारी सेवानिवृत्ति से बच सकें। वहीं, 1103 मामलों में जन्म तिथि आगे बढ़ाई गई। इतना ही नहीं, 5037 मामलों में ज्वाइनिंग डेट में भी बदलाव पाया गया, जिसमें कई कर्मचारियों की सेवा अवधि को 38 साल तक बढ़ा दिया गया।
सबसे गंभीर बात यह रही कि 572 कर्मचारियों के मामले ऐसे मिले, जिनमें जन्म तिथि और ज्वाइनिंग डेट दोनों ही बदली गई थीं। यह साफ संकेत देता है कि यह कोई छोटी गड़बड़ी नहीं, बल्कि एक संगठित नेटवर्क द्वारा किया गया ‘डेटा मैनिपुलेशन’ था।
यह पूरा मामला अब राज्य सरकार के लिए चुनौती बन चुका है, क्योंकि इससे न सिर्फ करोड़ों का नुकसान हुआ, बल्कि IFMS जैसे सुरक्षित माने जाने वाले सिस्टम की विश्वसनीयता भी सवालों के घेरे में आ गई है।
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Wednesday, May 20

