एक पेड़, एक विवाद… और 6 साल बाद इंसाफ: हत्या के दोषियों को उम्रकैद
औरंगाबाद व्यवहार न्यायालय ने छह साल पुराने हत्या मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए टंडवा थाना कांड संख्या 30/20 के दो दोषियों को सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। जिला जज पंचम उमेश प्रसाद की अदालत ने बुधन बिगहा निवासी आनंद मेहता और शंकर मेहता को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत उम्रकैद और 10-10 हजार रुपये जुर्माने की सजा दी है।
मामला एक शीशम के पेड़ के बंटवारे से जुड़ा था, जिसने देखते ही देखते खूनी रूप ले लिया। अदालत ने इसे सुनियोजित और क्रूर हत्या करार देते हुए कड़ा संदेश दिया है।
शीशम का पेड़ बना मौत की वजह: 17 गवाह, 6 साल की सुनवाई और उम्रकैद
अदालत में चली लंबी सुनवाई और 17 गवाहों की गवाही के बाद आखिरकार यमुना मेहता हत्याकांड में न्याय की मुहर लगी। 6 जनवरी 2026 को दोनों अभियुक्तों को दोषी ठहराया गया था, जिसके बाद सजा के बिंदु पर सुनवाई पूरी कर आजीवन कारावास सुनाया गया। घटना के समय से ही आनंद मेहता जेल में बंद था, जबकि शंकर मेहता को दोषसिद्धि के बाद बंधपत्र विखंडित कर जेल भेजा गया। अभियोजन पक्ष की ओर से एपीपी शिवपूजन प्रजापति ने मजबूती से पक्ष रखा।
घर पहुंचकर हुआ हमला, मौके पर मौत: पेड़ विवाद से हत्या तक की पूरी कहानी
10 मई 2020 को दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, सूचक परमानंद कुमार अपने पिता यमुना मेहता के साथ सुबह करीब 8 बजे विवाद सुलझाने अभियुक्तों के घर पहुंचे थे। आरोप है कि इसी दौरान आनंद मेहता और शंकर मेहता ने लोहे की रॉड और लाठी से यमुना मेहता पर जानलेवा हमला कर दिया। बेरहमी से की गई पिटाई में यमुना मेहता की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि परमानंद कुमार गंभीर रूप से घायल हो गया। 10 मई 2022 को आरोप गठित हुए और अंततः अदालत ने दोनों को हत्या का दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई।
