रैयतों के हक और अधिकार की है लड़ाई: योगेंद्र साव
दरअसल, 31 दिसंबर से योगेंद्र साव स्थानीय रैयतों के साथ अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठे हैं. हड़ताल के दौरान उन्होंने कहा कि यह लड़ाई सिर्फ उनकी नहीं, बल्कि क्षेत्र के रैयतों के हक और अधिकार की है. उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार और कोल खनन कंपनी द्वारा रैयतों को उचित मुआवजा नहीं दिया जा रहा है. वहीं खनन गतिविधियों से क्षेत्र में प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है.
बिना मुआवजा विस्थापन नीति का लाभ दिए कंपनी कैसे अपनी मनमानी करके संपत्ति अधिग्रहण कर लेगी? जिस रास्ते से एनटीपीसी कोयला का ट्रांसपोर्टेशन करती है वह जमीन भी हमारी है. जबरन कंपनी द्वारा ग्रामीणों की जमीन का अधिग्रहण बिना उचित मुआवजा दिए ही किया जा रहा है: योगेंद्र साव, पूर्व मंत्री
सरकार और कोल खनन कंपनी के खिलाफ बड़े आंदोलन की चेतावनी
योगेंद्र साव ने बताया कि प्रदूषण और अव्यवस्थित ट्रांसपोर्टिंग के कारण आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं, जिससे लोगों की जान जा रही है लेकिन न सरकार और न प्रशासन इस पर गंभीर है. हड़ताल के दौरान योगेंद्र साव अपने समर्थकों के साथ तीर-धनुष लिए नजर आए. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांगें नहीं मानी गई तो सरकार और कोल खनन कंपनी के खिलाफ बड़ा आंदोलन किया जाएगा. गौरतलब है कि पिछले दो सप्ताह से कोयला ट्रांसपोर्टिंग बंद है. जिससे सरकार को करोड़ों रुपये के नुकसान होने का अनुमान है.
धरने को प्रशासन कर रहा है प्रभावितः योगेंद्र साव
इधर, पूर्व मंत्री योगेंद्र साव ने कहा कि धरने को स्थानीय प्रशासन द्वारा प्रभावित किया जा रहा है, जिसे देखते हुए त्रिपक्षीय वार्ता होने तक मंगलवार शाम से ही माइंस में उत्खनन, प्रेषण, सीएचपी एवं कोल ट्रांसपोर्टिंग ठप करते हुए नाकाबंदी की जा रही है. कुछ दिन पहले, योगेंद्र साव की एक संपत्ति का कंपनी ने अधिग्रहण कर लिया था. उसी दिन से ये विरोध चल रहा है.