चरही में कोयला तस्करी का ‘काला साम्राज्य’ — रोज 20-25 ट्रक बिहार-यूपी रवाना, प्रशासन मौन!
हजारीबाग जिले का चरही क्षेत्र इन दिनों अवैध कोयला तस्करी के एक बड़े और संगठित नेटवर्क की गिरफ्त में है। बहेरा, गंझोनिया और करगी — यह तीन नाम अब कोयला तस्करी के पर्याय बन चुके हैं। विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, प्रतिदिन इन तीनों क्षेत्रों से मिलाकर 20 से 25 ट्रक अवैध कोयला लादकर बिहार और उत्तर प्रदेश की मंडियों की ओर रवाना किए जाते हैं। यह सिलसिला न कोई नया है, न थमने का नाम ले रहा है। दिन में साइकिल-मोटरसाइकिल से निर्धारित पॉइंट तक कोयला पहुंचाना, शाम ढलते ही ट्रैक्टर से ढुलाई और रात दस बजे के बाद ट्रकों में भरकर रवाना — यह पूरी प्रक्रिया किसी सुनियोजित कारखाने की भांति बेखौफ संचालित हो रही है। स्थानीय निवासी दबी जुबान में स्वीकार करते हैं कि “यहां सब कुछ ‘सेटिंग’ से चलता है।” यह सवाल अब बड़ा होता जा रहा है कि आखिर किसकी शह पर यह ‘काला कारोबार’ दिन-रात बेरोक-टोक जारी है?
🔴 बहेरा — तापिन नॉर्थ कोलियरी की छाया में पल रहा है ‘कोयला माफिया’ का सबसे बड़ा अड्डा!
चरही थाना क्षेत्र अंतर्गत बहेरा इलाका अवैध कोयला तस्करी का सबसे बड़ा और सबसे सक्रिय केंद्र बनकर उभरा है। अकेले इस एक पॉइंट से प्रतिदिन 10 से 15 ट्रक अवैध कोयला रवाना होने की सूचना है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि बहेरा, Central Coalfields Limited (CCL) की तापिन नॉर्थ कोलियरी से मात्र आधा किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यही भौगोलिक निकटता इस इलाके को तस्करों के लिए ‘सोने की खान’ बना देती है। दिन के उजाले में कोलियरी से मोटरसाइकिल व साइकिल पर कोयला निर्धारित पॉइंट पर पहुंचाया जाता है। सूर्यास्त होते ही ट्रैक्टरों की कतार लग जाती है और रात दस बजे के बाद बड़े ट्रकों में यह कोयला भरकर प्रदेश की सीमाओं के बाहर भेज दिया जाता है। सूत्रों की मानें तो उच्च गुणवत्ता वाले इस कोयले की मंडी में भारी मांग है, जिसके चलते तस्करों में इस ‘पॉइंट’ को हथियाने की होड़ मची रहती है और यहां से मोटी कमाई होती है।
🔴 जान हथेली पर रखकर उतरते हैं खदान में — बंगाल से बुलाए जा रहे मजदूर, 24 घंटे चल रही है ‘मौत की खुदाई’!
अवैध कोयला तस्करी की इस पूरी कड़ी में सबसे दर्दनाक पहलू है — उन मजदूरों की जिंदगी जो इस ‘काले धंधे’ की नींव बने हुए हैं। बहेरा और आसपास के क्षेत्रों में 8 से 10 अवैध माइंस सक्रिय हैं, जहां चौबीसों घंटे बिना किसी सुरक्षा उपकरण के अवैध उत्खनन चलता रहता है। आसपास के ग्रामीण, जिनके पास आजीविका का कोई और साधन नहीं, वे भी पेट की आग बुझाने के लिए इन जोखिम भरी खदानों में उतर रहे हैं। सूत्र बताते है कि हालात यह हैं कि अवैध उत्खनन की मांग पूरी करने के लिए तस्कर पश्चिम बंगाल से भी मजदूर बुलवा रहे हैं। यह मजदूर न्यूनतम मजदूरी पर अपनी जान जोखिम में डालकर काम करते हैं। किसी दिन कोई हादसा हो जाए तो उसे भी दबा दिया जाता है। जानकारों का मानना है कि इन अवैध खदानों में न तो सरकारी मानकों का पालन होता है, न ही मजदूरों को कोई सुरक्षा मिलती है। रोजाना हजारों टन कोयला इन्हीं अवैध माइंस से निकाला जाता है और सीधे तस्करों के नेटवर्क को सौंप दिया जाता है।
छापेमारी सिर्फ खानापूर्ति? कई बार जब्त हुआ अवैध कोयला, फिर भी नहीं थम रहा कारोबार
बहेरा और चरही क्षेत्र में अवैध कोयला कारोबार कोई नई बात नहीं है। पूर्व के आंकड़े इस बात की गवाही देते हैं कि समय-समय पर पुलिस और सीसीएल सुरक्षा विभाग ने कई बार कार्रवाई की, लेकिन तस्करी का नेटवर्क खत्म नहीं हो सका। फरवरी 2020 में पुलिस और Central Coalfields Limited (CCL) की सुरक्षा टीम ने बहेरा चेकडैम के पास छापेमारी कर करीब 5 टन स्टीम कोयला जब्त किया था। इसके अलावा तापिन नॉर्थ और 41 नंबर कॉलोनी क्षेत्र से भी भारी मात्रा में अवैध कोयला बरामद किया जा चुका है। बावजूद इसके आज भी रात के अंधेरे में ट्रकों की आवाजाही जारी है
कोयले की काली कमाई पर किसका संरक्षण? चरही में उठने लगे बड़े सवाल
बहेरा में चल रहे अवैध कोयला कारोबार को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा का विषय बना हुआ है जिस स्तर पर ट्रकों से कोयले की ढुलाई हो रही है, वह बिना संरक्षण के संभव नहीं है।
अगले अंक में: बहेरा के ‘कोयला किंग’ का होगा बड़ा खुलासा! बिहार-यूपी तक फैले तस्करी नेटवर्क की अंदरूनी कहानी, कौन है मास्टर माइंड, किसके संरक्षण में चलता है करोड़ों का यह काला कारोबार? पढ़िए कल दैनिक स्टेट में…

