बेरमो के बंद खदानों से निकाल बालीडीह के प्लांटों तक पहुंच रहा अवैध कोयला
बालीडीह के विभिन्न प्लांट बने अवैध कोयला खपाने का अड्डा, संगठित गिरोह सक्रिय
बेरमो : बेरमो अनुमंडल के सीसीएल ढोरी, बीएंडके तथा कथारा क्षेत्र में अवैध कोयला कारोबार का एक संगठित नेटवर्क इन दिनों चर्चा में है। बंद पड़ी कोयला खदानों, आउटसोर्सिंग परियोजनाओं के आसपास के इलाकों, रेलवे साइडिंग और ट्रांसपोर्टिंग रूट से कोयला चोरी कर उसे बालीडीह औद्योगिक क्षेत्र के विभिन्न प्लांटों तक पहुंचाया जा रहा है। बालीडीह के कई प्लांट इस अवैध कोयले की खपत के बड़े अड्डा बन गए हैं।
संगठित गिरोह कर रहे हैं क्षेत्रवार काम
इस पूरे अवैध कारोबार में संगठित गिरोह सक्रिय हैं, जो क्षेत्रवार जिम्मेदारी बांटकर काम करते हैं। कुछ गिरोह बंद खदानों और डंपिंग यार्ड से कोयला इकट्ठा करते हैं, जबकि अन्य गिरोह परिवहन और सप्लाई का जिम्मा संभालते हैं। रात से लेकर अहले सुबह तक कई इलाकों में अवैध ढुलाई का सिलसिला चलता रहता है। सूत्रों के अनुसार, ढोरी, बीएंडके और कथारा क्षेत्र की कई बंद परियोजनाएं तथा परित्यक्त खदानें अवैध कारोबारियों के लिए आसान ठिकाना बन चुकी हैं। खदानों में बचे अवशेष कोयले को मजदूरों के जरिए निकाला जाता है और फिर साइकिल तथा बाइक से तय स्थानों तक पहुंचाया जाता है। कुछ दिनों के बाद इस कोयले को औद्योगिक इकाइयों की ओर रवाना कर दिया जाता है।
स्थानीय लोगों ने उठाई संयुक्त अभियान की मांग
क्षेत्र में बढ़ते अवैध कारोबार को लेकर स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से संयुक्त अभियान चलाने की मांग की है। लोगों का कहना है कि पुलिस, सीआईएसएफ, रेलवे सुरक्षा बल और सीसीएल प्रबंधन के बीच समन्वय बनाकर नियमित कार्रवाई की जाए तो इस नेटवर्क को तोड़ा जा सकता है। स्थानीय निवासियों का कहना है: “बंद खदानों और सुनसान इलाकों में सुरक्षा बढ़ाने, रात में गश्ती तेज करने तथा संदिग्ध वाहनों की जांच को और सख्त बनाने की जरूरत है, ताकि कोयला चोरी और तस्करी पर स्थायी रोक लगाई जा सके। इससे बेरोजगारी और आर्थिक तंगी से जूझ रहे युवाओं को इस गलत धंधे में शामिल होने से रोका जा सके।”

