लौह अयस्क का काला साम्राज्य! हर दिन 10 हजार टन गायब, सिस्टम बना मूकदर्शक”
पश्चिमी सिंहभूम के जेटेया, नोवामुंडी, बड़ाजामदा और गुवा इलाके में लौह अयस्क तस्करी अब चोरी नहीं, बल्कि खुलेआम चल रहा उद्योग बन चुका है। सूत्रों के मुताबिक हर दिन 10 हजार टन से ज्यादा लौह अयस्क अवैध तरीके से निकालकर अलग-अलग प्लांटों तक पहुंचाया जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि भारी मशीनें, दर्जनों ट्रक और लंबा नेटवर्क सड़कों पर दौड़ रहा है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति दिख रही है। माफिया इतने बेखौफ हैं मानो कानून ने खुद आंखों पर पट्टी बांध ली हो। “तस्करी गैंग के तीन चेहरे! मशीन, मजदूर और माल… सबका अलग ‘मंत्री’”
सूत्रों के मुताबिक इस संगठित लौह अयस्क तस्करी नेटवर्क में सन्नी, संतोष और अरविंद की भूमिका सबसे अहम मानी जा रही है। बताया जाता है कि कोई मशीनों की तैनाती संभाल रहा है, तो कोई मजदूरों और ट्रकों की आवाजाही का हिसाब देख रहा है। वहीं अवैध अयस्क को अलग-अलग प्लांटों तक पहुंचाने का जिम्मा भी इसी नेटवर्क के हाथ में बताया जा रहा है। दिलचस्प बात यह है कि पूरा खेल इतने व्यवस्थित तरीके से चल रहा है मानो कोई कॉर्पोरेट कंपनी ऑपरेट हो रही हो। फर्क सिर्फ इतना है कि यहां कारोबार कागजों पर नहीं, अंधेरे में चल रहा है। कौन है सन्नी? चाईबासा से रांची तक गूंज रहा ‘आयरन किंग’ का नाम”
लौह अयस्क तस्करी की दुनिया में इन दिनों सबसे ज्यादा चर्चा एक नाम की हो रही है — सन्नी। सूत्र बताते हैं कि रांची का रहने वाला यह शख्स अब पश्चिमी सिंहभूम से लेकर रामगढ़, लातेहार, धनबाद और चतरा तक अपना नेटवर्क फैला चुका है। कहा जा रहा है कि अवैध लौह अयस्क को अलग-अलग प्लांटों में खपाने के लिए लंबा सिंडीकेट तैयार किया गया है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर सन्नी के पीछे किसका संरक्षण है? राजनीतिक गलियारों में भी यह चर्चा तेज है कि बिना बड़े रसूख के इतना बड़ा खेल संभव नहीं। दैनिक स्टेट अगले अंक में इस पूरे सिंडीकेट की अंदरूनी परतें खोलेगा। “झामुमो का अल्टीमेटम: 7 दिन में रोकिए तस्करी, नहीं तो पार्टी खुद करेगी ‘ऑपरेशन आयरन’”
लौह अयस्क तस्करी के खिलाफ अब राजनीतिक पारा भी चढ़ गया है। चाईबासा में झारखंड मुक्ति मोर्चा जिला कोर समिति की बैठक में प्रशासन पर सीधा हमला बोला गया। जिलाध्यक्ष सोनाराम देवगम की अध्यक्षता में हुई बैठक में आरोप लगाया गया कि अवैध खनन का खेल सत्ता और सिस्टम की नाक के नीचे धड़ल्ले से चल रहा है। पार्टी ने उपायुक्त से लेकर एसपी तक को पत्र भेजकर सात दिनों में कार्रवाई की मांग की। साथ ही चेतावनी दी गई कि अगर प्रशासन नहीं जागा तो झामुमो खुद मैदान में उतरकर अवैध कारोबारियों के खिलाफ मोर्चा खोलेगी।कार्रवाई बनी ‘ढाक के तीन पात’”
झामुमो द्वारा प्रशासन को पत्र भेजे जाने के बाद उम्मीद थी कि अवैध खनन पर बड़ी कार्रवाई होगी, लेकिन हालात जस के तस हैं। न किसी अवैध माइंस पर बड़ी छापेमारी हुई, न ही किसी बड़े तस्कर पर प्राथमिकी दर्ज हुई। सूत्र बताते हैं कि विरोध के बाद तस्करों ने अपना नेटवर्क और मजबूत कर लिया है। अब सड़क पर मुखबिरों की फौज तैनात है ताकि कोई कार्यकर्ता ट्रकों को रोक न सके। यानी विरोध के बाद तस्करी बंद नहीं हुई, बल्कि पहले से ज्यादा ‘स्मार्ट’ हो गई है। प्रशासन की चुप्पी अब कई सवाल खड़े कर रही है।
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Sunday, August 16

