धर्मेंद्र पटेल । दैनिक स्टेट
NH-23 पर ‘स्वच्छता शुल्क’ के नाम पर वसूली! गोला पुल पर हर गाड़ी से ₹50, आखिर किसकी अनुमति?
रामगढ़/गोला: रामगढ़-बोकारो NH-23 पर गोला थाना क्षेत्र के गोला पुल के पास एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में यहां एक व्यक्ति कथित तौर पर आने-जाने वाली गाड़ियों से ₹50 प्रति वाहन “स्वच्छता शुल्क” के नाम पर वसूल रहा है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि वसूली करने वाला व्यक्ति गले में आई-कार्ड पहनकर खुलेआम यह काम करता है और बदले में बाकायदा रसीद भी देता है।
गले में आई-कार्ड, हाथ में रसीद… NH पर खुलेआम ₹50 की वसूली
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को देखे तो के गोला पुल के पास तैनात व्यक्ति हर गुजरने वाले वाहन से ₹50 मांगता है। उसके गले में लगे आई-कार्ड पर “स्वच्छ भारत अभियान, माँ छिन्नमस्तिका ट्रस्ट, प्रखंड कमिटि-गोला (जिला-रामगढ़)” लिखा हुआ है। कार्ड पर उसका नाम तानु साव अंकित है। इससे आम लोगों को यह आभास होता है कि वह किसी अधिकृत संस्था का प्रतिनिधि है, जिसके कारण कई वाहन चालक बिना विरोध राशि दे देते हैं।
पैसे के बदले रसीद भी… लेकिन एक फोन नंबर निकला अमान्य
वाहन चालकों को दी जाने वाली रसीद पर “कचरा, कूड़ा दान, रोड सफाई एवं पेशाब घर बनाने हेतु स्वच्छता शुल्क” लिखा है। रसीद पर दो मोबाइल नंबर भी छपे हैं। जब दैनिक स्टेट की टीम ने जांच के लिए 62064854 नंबर पर संपर्क किया तो नंबर अमान्य मिला। वहीं दूसरे नंबर 8340157623 पर बात करने पर संबंधित व्यक्ति ने दावा किया कि इस अभियान की जानकारी गोला थाना और गोला प्रखंड प्रशासन को दी गई है तथा यह कार्य “सबके सहयोग” से चल रहा है। हालांकि उसने किसी लिखित अनुमति या सरकारी आदेश की जानकारी नहीं दी।
क्या राष्ट्रीय राजमार्ग पर इस तरह वसूली की अनुमति मिल सकती है?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या किसी निजी ट्रस्ट, समिति या व्यक्ति को राष्ट्रीय राजमार्ग पर गुजरने वाले वाहनों से इस तरह शुल्क लेने का कानूनी अधिकार है? सामान्यतः राष्ट्रीय राजमार्ग पर किसी भी प्रकार का शुल्क केवल सरकार द्वारा अधिकृत एजेंसी या टोल प्लाजा ही निर्धारित नियमों के तहत वसूल सकती है। यदि किसी संस्था को सार्वजनिक सहयोग राशि लेनी भी हो, तो वह स्वैच्छिक होनी चाहिए, न कि सड़क पर वाहन रोककर अनिवार्य रूप से वसूली की जाए।
स्थानीय प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल, जांच की मांग तेज
गोला पुल जैसे व्यस्त मार्ग पर यदि लंबे समय से खुलेआम वसूली हो रही है तो स्थानीय प्रशासन और पुलिस की जानकारी में यह मामला क्यों नहीं आया? यदि जानकारी थी तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई? और यदि जानकारी नहीं थी तो आखिर इतनी खुली गतिविधि पर निगरानी क्यों नहीं रही? देखने वाली बात होगी कि क्या स्थानीय प्रशासन, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और पुलिस इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच इस तरह के क्या करवाई करेगी
माँ छिन्नमस्तिका ट्रस्ट के नाम पर वसूली? रसीद और आई-कार्ड ने खड़े किए कई गंभीर सवाल, अगले खुलासे में होंगे बड़े खुलासे
रामगढ़-बोकारो NH-23 पर कथित “स्वच्छता शुल्क” वसूली मामले में अब रसीद और आई-कार्ड से कई नए सवाल सामने आए हैं। वसूली करने वाले व्यक्ति के आई-कार्ड और रसीद पर “माँ छिन्नमस्तिका ट्रस्ट, प्रखंड कमिटी-गोला” अंकित है, लेकिन कहीं भी ट्रस्ट का पंजीकरण (Registration) नंबर दर्ज नहीं है। आमतौर पर किसी पंजीकृत संस्था या ट्रस्ट के दस्तावेजों पर उसकी पहचान से जुड़ी जानकारी दर्ज रहती है। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या यह ट्रस्ट विधिवत पंजीकृत है या नहीं।
इसके साथ ही यह भी जांच का विषय है कि क्या माँ छिन्नमस्तिका जैसे प्रसिद्ध धार्मिक नाम का इस्तेमाल यात्रियों पर मनोवैज्ञानिक प्रभाव डालकर सहयोग राशि लेने के लिए किया जा रहा है, या इसके पीछे कोई वैध संस्था कार्यरत है। फिलहाल इन सवालों के स्पष्ट जवाब सामने नहीं आए हैं।
दैनिक स्टेट इस पूरे मामले की पड़ताल कर रहा है। ट्रस्ट के पंजीकरण, वैधानिक स्थिति, प्रशासनिक अनुमति और सड़क पर वसूली के अधिकार सहित सभी पहलुओं की गहन छानबीन की जा रही है। हमारे अगले अंक में इस पूरे मामले से जुड़े दस्तावेजों और तथ्यों के आधार पर बड़ा खुलासा प्रकाशित किया जाएगा।
नोट: यह खबर उपलब्ध दस्तावेजों, रसीद, आई-कार्ड और दैनिक स्टेट टीम द्वारा किए गए फोन सत्यापन के आधार पर तैयार की गई है। संबंधित प्रशासन या ट्रस्ट का आधिकारिक पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

