रात के अंधेरे में ‘ब्लैक रूट’ एक्टिव! ऐसे चल रहा कोयला चोरी और तस्करी का पूरा खेल
बेरमो के चलकरी पुल से होकर गुजरने वाला रास्ता इन दिनों कोयला तस्करों के लिए सबसे सुरक्षित कॉरिडोर बन गया है। सूत्रों के अनुसार बोकारो कोलियरी, खासमहल और बरुआबेड़ा रेलवे साइडिंग से रात के समय कोयला चोरी कर पहले चार नंबर, बरुआबेड़ा और जरीडीह बस्ती के आसपास जमा किया जाता है। इसके बाद बाइक, ऑटो, साइकिल और छोटे पिकअप वाहनों के जरिए धीरे-धीरे खेप आगे बढ़ाई जाती है ताकि किसी को शक न हो। तस्कर दामोदर नदी पर बने चलकरी पुल का इस्तेमाल कर कोयले को पेटरवार क्षेत्र में पहुंचाते हैं। वहां से जंगल और ग्रामीण रास्तों के सहारे यह काला कारोबार आगे बढ़ता है। स्थानीय लोगों का दावा है कि पूरी प्रक्रिया बेहद संगठित तरीके से संचालित हो रही है।
बंगाल बॉर्डर से BIADA प्लांट तक… आखिर कहां खप रहा है चोरी का कोयला?
अवैध कोयले का यह नेटवर्क सिर्फ सीमावर्ती इलाकों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका बाजार लगातार फैलता जा रहा है। जानकारी के मुताबिक चलकरी पुल पार करने के बाद कोयले की खेप पेटरवार, जरीडीह और कसमार के रास्ते बंगाल सीमा तक पहुंचाई जाती है। वहां विभिन्न अवैध मंडियों और छोटे औद्योगिक क्षेत्रों में ऊंचे दामों पर इसकी बिक्री होती है। सूत्र बताते हैं कि बोकारो के बालीडीह स्थित कुछ छोटे प्लांटों और भट्टों में भी सस्ते दर पर यही अवैध कोयला खपाया जा रहा है। कम कीमत मिलने के कारण इसकी मांग लगातार बनी हुई है। इस अवैध सप्लाई से कोल कंपनियों और सरकार को लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है, जबकि तस्करों का नेटवर्क लगातार मजबूत होता जा रहा है।
छापेमारी के दावे बड़े, लेकिन जमीन पर कार्रवाई शून्य! बढ़ता जा रहा तस्करों का हौसला
सीआईएसएफ और स्थानीय सुरक्षा एजेंसियां लगातार छापेमारी और निगरानी का दावा कर रही हैं, लेकिन हकीकत यह है कि कोयला तस्करी का नेटवर्क पहले से ज्यादा सक्रिय दिखाई दे रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यदि प्रभावी कार्रवाई होती तो खुलेआम रात में कोयला ढुलाई संभव नहीं होती। रेलवे साइडिंग से लेकर दामोदर पुल और जंगल रास्तों तक तस्करों की आवाजाही लगातार जारी है। छोटे वाहनों के इस्तेमाल से तस्कर आसानी से सुरक्षा एजेंसियों की नजर से बच निकलते हैं। लोगों का कहना है कि कार्रवाई सिर्फ कागजों तक सीमित रह गई है, जबकि जमीनी स्तर पर तस्करों का मनोबल लगातार बढ़ रहा है। यही वजह है कि चलकरी पुल अब अवैध कोयला कारोबार का सबसे बड़ा ट्रांजिट प्वाइंट बनता जा रहा है।
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Monday, May 18

