ड्यूटी के दौरान बिगड़ी तबीयत, अस्पताल की जगह घर भेजा गया; मजदूर की मौत से फैक्ट्री प्रबंधन पर सवाल। रामगढ़ जिले के हेसला स्थित झारखंड इस्पात प्राइवेट लिमिटेड में कार्यरत मजदूर गोपी करमाली की इलाज के दौरान मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि ड्यूटी के दौरान गोपी के पेट में अचानक तेज दर्द उठा, लेकिन फैक्ट्री प्रबंधन ने तत्काल अस्पताल भेजने के बजाय उसे घर छोड़ दिया। बाद में परिजन गंभीर हालत में उसे रांची के रिम्स लेकर पहुंचे, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। घटना के बाद फैक्ट्री की आपातकालीन स्वास्थ्य व्यवस्था और प्रबंधन की संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
समय पर इलाज मिलता तो बच सकती थी जान? मजदूर की मौत के बाद उठे बड़े सवाल। मृतक के परिजनों का कहना है कि यदि फैक्ट्री प्रबंधन समय रहते एंबुलेंस की व्यवस्था कर किसी सक्षम अस्पताल में भर्ती कराता, तो गोपी करमाली की जान बच सकती थी। इस घटना ने औद्योगिक इकाइयों में कार्यरत मजदूरों के लिए मेडिकल इमरजेंसी प्रोटोकॉल की हकीकत उजागर कर दी है। विशेषज्ञों का भी मानना है कि कार्यस्थल पर अचानक स्वास्थ्य बिगड़ने की स्थिति में हर मिनट महत्वपूर्ण होता है और इलाज में देरी कई बार जानलेवा साबित होती है।
₹80 हजार देकर मामला शांत कराने का आरोप, परिवार ने मांगा न्याय और स्थायी सहारा। ग्रामीण ने आरोप लगाया है कि घटना के बाद फैक्ट्री प्रबंधन ने लगभग ₹80 हजार की आर्थिक सहायता देकर मामले को समाप्त करने का प्रयास किया। परिवार का कहना है कि गोपी करमाली घर के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे और उनकी मौत के बाद परिवार के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। परिजनों ने उचित मुआवजा, आश्रित को स्थायी नौकरी तथा पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
बॉयलर हादसे के बाद फिर मौत, आखिर कब सुरक्षित होंगे फैक्ट्री के मजदूर?यह पहला अवसर नहीं है जब झारखंड इस्पात प्राइवेट लिमिटेड किसी गंभीर घटना को लेकर चर्चा में आई है। करीब दो माह पहले फैक्ट्री में हुए बॉयलर विस्फोट में कई मजदूरों की मौत हुई थी। ग्रामीणों का कहना है कि लगातार सामने आ रही घटनाओं ने औद्योगिक सुरक्षा मानकों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब श्रम विभाग, फैक्ट्री निरीक्षण विभाग और जिला प्रशासन से मांग उठ रही है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय की जाए। यदि किसी स्तर पर लापरवाही साबित होती है तो दोषियों पर कड़ी कार्रवाई, मृतक परिवार को उचित मुआवजा और आश्रित को रोजगार उपलब्ध कराया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

