DSPMU में खेल विभाग पर गंभीर आरोप, छात्रों का हंगामा; तालाबंदी से पांच घंटे ठप रही पढ़ाई
खेल विभाग पर गंभीर आरोप, विरोध में विश्वविद्यालय का मुख्य द्वार हुआ बंद
रांची स्थित डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय (DSPMU) में शुक्रवार को आदिवासी छात्र संघ (एसीएस) के नेतृत्व में छात्रों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक विश्वविद्यालय में तालाबंदी कर कक्षाएं पूरी तरह ठप कर दी गईं। छात्रों का आरोप है कि खेल विभाग में लंबे समय से अनियमितताएं चल रही हैं, लेकिन शिकायतों के बावजूद प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। विरोध प्रदर्शन के दौरान विश्वविद्यालय परिसर में नारेबाजी हुई और छात्र संगठन ने दोषियों पर तत्काल कार्रवाई की मांग की।
खेल शिक्षक पर अवैध वसूली और महिला खिलाड़ियों के कथित शोषण के आरोप
प्रदर्शन कर रहे छात्र-छात्राओं ने खेल शिक्षक परमेश्वर महतो पर राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भेजने के नाम पर खिलाड़ियों से अवैध रूप से पैसे लेने का आरोप लगाया। महिला छात्राओं ने उनके खिलाफ यौन शोषण के भी गंभीर आरोप लगाए हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि खिलाड़ियों के साथ अभद्र व्यवहार किया जाता है और खेल गतिविधियों को पारदर्शी तरीके से संचालित नहीं किया जा रहा। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और मामले की जांच प्रक्रिया जारी बताई जा रही है।
लाखों रुपये लेकर स्पोर्ट्स सर्टिफिकेट जारी करने का दावा, जांच रिपोर्ट पर उठे सवाल
छात्र संगठनों का आरोप है कि विश्वविद्यालय के खेल प्रमाण-पत्र बाहरी लोगों को लाखों रुपये लेकर जारी किए गए। इस संबंध में 27 अप्रैल को कुलपति डॉ. राजीव मनोहर को ज्ञापन सौंपा गया था, जिसके बाद जांच का आश्वासन मिला। बाद में 5 जून को प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से भी मुलाकात कर पूरे मामले की जानकारी दी। छात्रों का कहना है कि जांच समिति का गठन तो हुआ, लेकिन आज तक उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई, जिससे पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
कुलपति और खेल समन्वयक का पुतला दहन, कार्रवाई तक आंदोलन जारी रखने की चेतावनी
कार्रवाई में देरी से नाराज छात्रों ने विश्वविद्यालय के कुलपति और खेल विभाग के समन्वयक का पुतला दहन किया। प्रदर्शन में आदिवासी छात्र संघ के कई पदाधिकारी, झारखंड स्पोर्ट्स यूनियन के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं शामिल हुए। छात्र नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि आरोपों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई और जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई, तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। फिलहाल विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इन आरोपों पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।

