माननीय मुख्यमंत्री जी,
विषय : कृषक हित में संचालित धान अधिप्राप्ति योजना के अंतर्गत गुमला जिला में लैम्पस द्वारा की गई धान खरीद में हुई गंभीर अनियमितताओं के जाँच प्रतिवेदन के आलोक में दोषी पदाधिकारियों एवं कर्मचारियों पर FIR दर्ज कर कड़ी कार्रवाई करने तथा वर्तमान वर्ष की धान खरीद में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के संबंध में।
माननीय मुख्यमंत्री जी,
उपरोक्त विषयक के संदर्भ में अवगत कराना है कि विगत वर्ष राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी धान अधिप्राप्ति योजना के अंतर्गत गुमला जिला में किसानों से धान की खरीद की गई थी। परंतु इस प्रक्रिया में जिला आपूर्ति पदाधिकारी, प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी, संबंधित लैम्पस के अध्यक्ष एवं सचिव तथा राज्य खाद्य निगम में कार्यरत कंप्यूटर ऑपरेटर सोनू कुमार वर्मा द्वारा आपसी मिलीभगत कर वास्तविक किसानों को लाभ से वंचित करते हुए बिचौलियों एवं अपने जान-पहचान के लोगों को अनुचित लाभ पहुँचाया गया।
E-Uparjan पोर्टल पर निबंधित किसानों का अंचल स्तर से भूमि सत्यापन कराए बिना ही जिला आपूर्ति पदाधिकारी, गुमला द्वारा भुगतान कर दिया गया। इस गंभीर अनियमितता से आहत वास्तविक किसानों ने उपायुक्त, गुमला को आवेदन देकर जाँच की माँग की, जिसके बाद अपर समाहर्ता की अध्यक्षता में गठित जाँच समिति द्वारा मामले की जाँच की गई।
जाँच प्रतिवेदन में यह स्पष्ट रूप से सामने आया कि धान खरीद प्रक्रिया में भारी अनियमितता हुई है तथा इसमें जिला आपूर्ति पदाधिकारी, लैम्पस सचिव एवं राज्य खाद्य निगम के कंप्यूटर ऑपरेटर सोनू कुमार वर्मा की संलिप्तता रही है। जाँच समिति द्वारा दोषी पदाधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध निलंबन एवं कठोर कार्रवाई की अनुशंसा की गई, किंतु अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। आज भी संबंधित कंप्यूटर ऑपरेटर अपने पद पर बने रहकर अनियमितताओं को अंजाम दे रहा है, जो अत्यंत गंभीर विषय है।
जाँच प्रतिवेदन में यह भी उल्लेख है कि गुमला जिला के पालकोट अंचल सहित विभिन्न लैम्पस क्षेत्रों में लाभुक किसानों के वास्तविक भूमि रकबे से अधिक दिखाकर धान की खरीद दर्शाई गई, जिससे प्रति क्विंटल लगभग 600–700 रुपये का गबन किया गया। जबकि सरकारी खरीद में विलंब के कारण किसान मजबूरन 1600–1700 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बाजार में धान बेच देते हैं। इस प्रकार एक-एक अंचल में करोड़ों रुपये के गबन का मामला सामने आया है।
चिंताजनक तथ्य यह भी है कि प्रदेश के अन्य जिलों से भी इसी प्रकार की सूचनाएँ प्राप्त हो रही हैं, जिससे प्रतीत होता है कि यह एक संगठित एवं सुनियोजित घोटाला है, जिसमें जिला एवं प्रखंड स्तर के पदाधिकारियों, लैम्पस/पैक्स सचिवों तथा कंप्यूटर ऑपरेटरों की भूमिका है।
अतः आपसे माँग की जाती है कि—
1. गुमला जिला में धान खरीद में हुई अनियमितताओं के संबंध में जाँच प्रतिवेदन के आलोक में दोषी पदाधिकारियों एवं कर्मचारियों पर अविलंब FIR दर्ज कर उन्हें सेवा से बर्खास्त किया जाए।
2. राज्यभर में धान अधिप्राप्ति योजना की उच्चस्तरीय निगरानी सुनिश्चित की जाए।
3. अंचल स्तर पर भूमि सत्यापन के उपरांत ही किसानों से धान की खरीद की जाए, ताकि वास्तविक लाभुक किसानों को ही योजना का लाभ मिल सके।
4. बिचौलियों की भूमिका को पूर्णतः समाप्त करने हेतु पारदर्शी व्यवस्था लागू की जाए।
सधन्यवाद।
संलग्नक : यथोक्त जाँच प्रतिवेदन।
भवदीय
(बाबूलाल मरांडी)

