भारत में जन्मा नया ‘ड्रीम गैंग’! बंदूक नहीं, डॉक्टर बनाने का सपना दिखाकर करोड़ों की वसूली
बिहार में सामने आए NEET सॉल्वर गैंग ने अपराध की दुनिया को नया चेहरा दे दिया है। यह कोई ऐसा गिरोह नहीं जो लोगों को धमकाकर पैसा वसूलता हो, बल्कि यह छात्रों और अभिभावकों को मेडिकल कॉलेज की चमकदार सीटों का सपना बेचकर लाखों रुपये ऐंठता है। जांच में खुलासा हुआ है कि हर अभ्यर्थी से 10 से 12 लाख रुपये तक की डील तय की जाती थी। पहले एडवांस लिया जाता और फिर सफलता की गारंटी के नाम पर बाकी रकम वसूली जाती। यह गैंग उन परिवारों को निशाना बना रहा था जो अपने बच्चों को डॉक्टर बनाने के लिए किसी भी कीमत तक जाने को तैयार थे। सवाल यह है कि क्या अब शिक्षा भी अपराधियों के लिए सबसे बड़ा कारोबार बन चुकी है?
परीक्षा केंद्र बना ‘क्राइम लैब’, बायोमेट्रिक मशीनों को ही बना लिया गया साजिश का हथियार
देशभर में बायोमेट्रिक सिस्टम को पहचान सत्यापन का सबसे सुरक्षित माध्यम माना जाता है, लेकिन लखीसराय में इसी व्यवस्था को अपराधियों ने अपने खेल का हिस्सा बना लिया। पुलिस जांच में सामने आया कि बायोमेट्रिक सत्यापन से जुड़े कुछ कर्मियों की मिलीभगत से फर्जी परीक्षार्थियों को असली उम्मीदवारों के स्थान पर परीक्षा केंद्र के भीतर पहुंचाया गया। यानी जिस तकनीक पर नकल रोकने की जिम्मेदारी थी, उसी तकनीक को अपराधियों ने अपनी ढाल बना लिया। यह खुलासा केवल एक गैंग की कहानी नहीं, बल्कि परीक्षा सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवालिया निशान है। यदि बायोमेट्रिक सिस्टम में सेंध लग सकती है, तो भविष्य की प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता कैसे बचाई जाएगी?
मेडिकल छात्र बने ‘मास्टरमाइंड’, डॉक्टर की पढ़ाई के साथ चला रहे थे करोड़ों का एग्जाम सिंडिकेट
इस पूरे मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि जिन युवाओं पर भविष्य में लोगों की जिंदगी बचाने की जिम्मेदारी होगी, उन्हीं में से कुछ पर परीक्षा माफिया का हिस्सा बनने का आरोप लगा है। जांच एजेंसियों के अनुसार विभिन्न मेडिकल कॉलेजों के छात्र सॉल्वर के रूप में इस्तेमाल किए जा रहे थे। पावापुरी मेडिकल कॉलेज और अन्य संस्थानों के छात्रों के नाम सामने आने के बाद शिक्षा जगत में भी हलचल मच गई है। यह केवल आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि उस नैतिक पतन की कहानी है जहां डॉक्टर बनने की राह पर चल रहे कुछ युवा ही शिक्षा व्यवस्था को खोखला करने में जुट गए। इससे मेडिकल शिक्षा की साख और चयन प्रक्रिया दोनों पर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं। ‘मुन्नाभा मॉडल 2.0’ का खुलासा, 30 गिरफ्तार लेकिन नेटवर्क कितना बड़ा?
पुलिस ने अब तक 30 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें मेडिकल छात्र, बायोमेट्रिक एजेंसी से जुड़े कर्मचारी और अन्य सहयोगी शामिल हैं। लेकिन जांच अधिकारियों का मानना है कि यह केवल हिमखंड का ऊपरी हिस्सा है। बैंक खातों, मोबाइल कॉल रिकॉर्ड और डिजिटल ट्रांजेक्शन की जांच से कई और नाम सामने आ सकते हैं। खास बात यह है कि इस रैकेट की जड़ें केवल एक परीक्षा केंद्र तक सीमित नहीं दिख रही हैं। पिछले वर्षों में सामने आए पेपर लीक और सॉल्वर गैंग मामलों से इसके संभावित संबंधों की भी जांच हो रही है। यदि यह नेटवर्क राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय निकला तो यह देश की प्रतियोगी परीक्षा प्रणाली के लिए सबसे बड़े खतरे के रूप में सामने आ सकता है।
विशेष टिप्पणी:
“पहले गैंग डर दिखाकर पैसा वसूलते थे, अब कुछ गैंग सपने दिखाकर करोड़ों कमा रहे हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि यहां हथियार नहीं, मेडिकल सीट का लालच इस्तेमाल हो रहा है।”
Dream Gang Busted: Fake NEET Candidates, Biometric Breach and a Multi-Lakh Exam Scam Exposed
A major examination fraud has been uncovered in Bihar during the NEET re-examination, exposing what investigators describe as a sophisticated solver gang network. Unlike traditional criminal gangs, this racket allegedly earned money by selling dreams of medical admissions to students and parents. Police investigations reveal that fake candidates were made to appear in place of genuine aspirants after manipulating the biometric verification process with the help of insiders. More than two dozen suspects, including medical students and biometric agency personnel, have been arrested. Authorities are now tracing financial transactions, digital evidence, and possible links to a wider network operating across competitive examinations.

