🔥 “222 एकड़ जमीन का रहस्य! दस्तावेज गायब, फिर भी बेदखली जारी”
रामगढ़ जिले के पतरातू प्रखंड अंतर्गत हेसला पंचायत में 222 एकड़ जमीन को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। जिला प्रशासन इस जमीन को अवैध कब्जा बताते हुए खाली कराने की कार्रवाई कर रहा है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि इस भूमि अधिग्रहण से जुड़े कोई ठोस दस्तावेज मौजूद नहीं हैं। ग्रामीणों ने सूचना का अधिकार (RTI) के तहत जानकारी मांगी, तो प्रशासन ने साफ कहा कि अधिग्रहण से संबंधित कोई अभिलेख उपलब्ध नहीं है। वहीं, सरकारी हलफनामे में भी सिर्फ 12.59 एकड़ भूमि के दस्तावेज होने की बात स्वीकार की गई है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर 222 एकड़ जमीन का अधिग्रहण कब और कैसे हुआ? बिना दस्तावेज के बेदखली की कार्रवाई ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं और ग्रामीणों में भारी आक्रोश है।
🔥 “60 साल पुराना अधिग्रहण या सरकारी चूक? मुआवजे का नहीं कोई रिकॉर्ड”
जिला प्रशासन का दावा है कि वर्ष 1961-62 में हेसला पंचायत की जमीन का अधिग्रहण किया गया था, लेकिन स्थानीय मूल रैयतों का कहना है कि उनके पूर्वजों को कभी मुआवजा नहीं मिला। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि प्रशासन के पास इस अधिग्रहण और मुआवजा भुगतान से जुड़ा कोई दस्तावेज भी उपलब्ध नहीं है। यदि अधिग्रहण हुआ, तो भुगतान का रिकॉर्ड कहां है? और अगर नहीं हुआ, तो वर्तमान कार्रवाई किस आधार पर की जा रही है? इस पूरे मामले ने सरकारी तंत्र की पारदर्शिता और जवाबदेही पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। पीढ़ियों से बसे लोग अब खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। यह मामला सिर्फ जमीन का नहीं, बल्कि न्याय और अधिकार का बन चुका है, जहां ग्रामीण अपनी पहचान और अस्तित्व बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं।
🔥 “NTPC–JIADA को जमीन ट्रांसफर का दावा, बिना पुनर्वास लोगों पर संकट”
पतरातू थर्मल पावर स्टेशन (PTPS) के बंद होने के बाद इस जमीन को NTPC और JIADA को हस्तांतरित करने की बात कही जा रही है। लेकिन जमीन के स्वामित्व और अधिग्रहण पर स्पष्टता के बिना ही स्थानीय लोगों को बेदखल करने की कार्रवाई तेज हो गई है। हेसला पंचायत में करीब 4000 से अधिक आबादी और 900 से ज्यादा परिवार वर्षों से रह रहे हैं, जिनके पास यही एकमात्र पहचान और ठिकाना है। बिना किसी पुनर्वास योजना और मुआवजा दिए लोगों को हटाना मानवाधिकार के खिलाफ माना जा रहा है। इस मामले को झारखंड हाईकोर्ट में भी चुनौती दी गई है, जहां सरकार ने खुद 222 एकड़ अधिग्रहण से इनकार किया है। ऐसे में सवाल यह है कि आखिर किसके आदेश पर और किस आधार पर यह कार्रवाई हो रही है? प्रशासन की चुप्पी ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी है।
शात्तनु मिश्रा की हुंकार: हेसला में बिना कागज 222 एकड़ पर बेदखली, पहले मुआवजा फिर कार्रवाई”
राजीव गांधी पंचायती राज संगठन, झारखंड के उपाध्यक्ष शात्तनु मिश्रा ने रामगढ़ जिले के पतरातू प्रखंड अंतर्गत हेसला पंचायत की जमीन विवाद को लेकर प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि 4000 से अधिक आबादी और करीब 928 परिवारों वाली इस पंचायत की जमीन को 1961-62 में अधिग्रहित बताए जाने के बावजूद आज तक न तो मुआवजा दिया गया और न ही कोई आधिकारिक दस्तावेज उपलब्ध कराया गया। RTI के जवाब में भी प्रशासन द्वारा अभिलेख नहीं होने की बात स्वीकार की गई है। इसके बावजूद 222 एकड़ जमीन को अवैध कब्जा बताकर बेदखली की कार्रवाई की जा रही है। मिश्रा ने इसे अन्यायपूर्ण बताते हुए मांग की है कि पहले जमीन अधिग्रहण के सभी दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं, प्रभावित परिवारों को विधिसम्मत मुआवजा और पुनर्वास दिया जाए, तभी किसी प्रकार की बेदखली हो।

