केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने बयान को तोड़-मरोड़कर पेश करने पर जताई आपत्ति
पटना: केंद्रीय मंत्री श्री जीतन राम मांझी ने चुनाव प्रक्रिया को लेकर दिए गए अपने बयान को गलत तरीके से पेश किए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका बयान अपनी पार्टी के उम्मीदवार और प्रदेश अध्यक्ष श्री अनिल कुमार के मनोबल को लेकर था, जिसे मीडिया द्वारा तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा है।
श्री मांझी ने कहा, “लोकतंत्र में जनता ही मालिक होती है। लेकिन जब तक जनादेश अंतिम रूप से सामने नहीं आता, उम्मीदवारों का मनोबल बनाए रखना बेहद जरूरी है। मैंने इसी संदर्भ में अपने प्रदेश अध्यक्ष के मनोबल को लेकर बयान दिया था। इसे गलत तरीके से पेश करना दुर्भाग्यपूर्ण है।”
केंद्रीय मंत्री ने यह भी बताया कि चुनावी प्रक्रिया में सर्वोपरि भूमिका निर्वाचन आयोग की होती है और चुनाव अधिकारियों की जिम्मेदारी सीमित होती है। उन्होंने तत्कालीन जिलाधिकारी अभिषेक सिंह की सरकार की योजनाओं को जनता तक पहुंचाने में कुशल भूमिका का उदाहरण भी दिया।
श्री मांझी ने बिहार में राजनीतिक परिस्थितियों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि अब वह दौर नहीं रहा जब मतपेटी से जिन्न निकालने जैसी घटनाएँ होती थीं। अब जनता ही जनादेश तय करती है और जिसे जनादेश मिलता है, वही जनता की सेवा करता है। उन्होंने कांग्रेस और एनडीए के पिछले चुनावों का हवाला देते हुए कहा कि सत्ता में रहकर चुनावों को प्रभावित करना संभव नहीं है।
केंद्रीय मंत्री ने मीडिया से आग्रह किया है कि उनके बयान को सही संदर्भ में प्रकाशित किया जाए और किसी प्रकार की गलत व्याख्या से बचा जाए।
