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नगर निगम का बड़ा फैसला, इन कर्मचारियों व आफिसरों की ठेके पर होगी भर्ती

बठिंडा  : बठिंडा शहर की सीवरेज और जल आपूर्ति व्यवस्था को निजी कंपनी त्रिवेणी से टेकओवर करने से पहले नगर निगम ने कमर कस ली है। निगम ने इस दिशा में पहला कदम उठाते हुए ठेके पर एक्सईएन, एसडीओ और जेई की भर्ती करने का फैसला किया है। हाल ही में आयोजित जनरल हाउस मीटिंग में इस प्रस्ताव को बहुमत से पास कर दिया गया। नगर निगम निगम ने आगामी तीन वर्षों में सीवरेज और जलापूर्ति के काम की निगरानी व संचालन पर करीब 70 करोड़ रुपये खर्च करने का प्रस्ताव पेश किया, जिसे मंजूरी मिल गई। यह राशि अब तक त्रिवेणी कंपनी को दी जाने वाली राशि से लगभग चार गुना अधिक बताई जा रही है। विशेषज्ञों ने इस पर सवाल भी उठाए हैं, लेकिन जनरल हाउस में इस पर कोई खास बहस नहीं हुई और प्रस्ताव को बहुमत के आधार पर पारित कर दिया गया। अधिकारी होंगे डीसी रेट पर नियुक्त नगर निगम ने खुलासा किया कि उनके पास फिलहाल अनुभवी स्टाफ की भारी कमी है। ऐसे में ओएंडएम (ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस) कार्यों को सुचारु रूप से संभालने के लिए निम्नलिखित अधिकारी डीसी रेट पर भर्ती किए जाएंगे:

1 एक्सईएन (Water Supply & Sewerage), 2 एसडीओ (सीवरेज,) 2 एसडीओ (वाटर सप्लाई), 4 जेई (सीवरेज), 2 जेई (वाटर सप्लाई) इन अफसरों की सालाना सैलरी पर निगम करीब 1.25 करोड़ रुपये खर्च करेगा। नियुक्ति प्रक्रिया आउटसोर्सिंग के माध्यम से की जाएगी। बिल वितरण के लिए अलग स्टाफ की नियुक्ति सीवरेज और पानी के बिलों की वसूली भी निगम के लिए एक नई चुनौती होगी। पहले यह काम त्रिवेणी कंपनी के कर्मचारी करते थे। अब निगम ने इसके लिए 6 कर्मचारियों की भर्ती करने का निर्णय लिया है जो हर तीन महीने में लगभग 3000 घरों और दुकानों में बिल वितरित करेंगे। 70 दिनों तक चलने वाले इस कार्य में एक व्यक्ति औसतन 420 बिल प्रतिदिन वितरित करेगा। निगम इस कार्य पर कुल 10.34 लाख रुपये खर्च करेगा। निगम को मैनपावर और संसाधनों की जरूरत बढ़ते शहर और नई कॉलोनियों के जुड़ने के चलते नगर निगम को अतिरिक्त मैनपावर और संसाधनों की जरूरत पड़ेगी। फिलहाल पहले चरण में नगर निगम ने करीब 50 वार्डों में काम शुरू करने की योजना बनाई है। लेकिन आने वाले समय में 15 से 20 नए वार्डों के जुड़ने की संभावना है, जिससे निगम की जिम्मेदारियां और बढ़ जाएंगी। नई कॉलोनियों में होंगे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स निगम को नई कॉलोनियों में सीवरेज लाइन बिछाने, पाइपलाइन डालने और नए वॉटर वर्क्स तैयार करने जैसे प्रोजेक्ट्स भी शुरू करने होंगे। इससे पहले चरण में ही निगम करोड़ों रुपये की मशीनरी खरीदने और कर्मचारियों की नियुक्ति करने की दिशा में कदम उठा रहा है। बड़ी चुनौती, लेकिन उम्मीद भी त्रिवेणी कंपनी से कार्यभार वापस लेना नगर निगम के लिए एक बड़ी प्रशासनिक और तकनीकी चुनौती है। लेकिन यदि निगम ने योजना अनुसार काम किया, तो आने वाले समय में बठिंडा शहर में बेहतर सीवरेज और जल आपूर्ति व्यवस्था देखी जा सकती है।