दैनिक स्टेट की खोजी खबर पर लगी प्रशासनिक मुहर! रामगढ़ डीसी की पहल से राजा राममोहन राय के ऐतिहासिक दस्तावेजों की शुरू हुई तलाश
धर्मेंद्र पटेल & चंदन कुमार
रामगढ़: इतिहास के धूल भरे पन्नों में दबे एक अध्याय को सामने लाने की दैनिक स्टेट की विशेष खोजी रिपोर्ट के बाद अब रामगढ़ जिला प्रशासन ने भी बड़ी पहल की है। उपायुक्त ऋतुराज के नेतृत्व में जिला प्रशासन ने आम लोगों से राजा राममोहन राय के रामगढ़ प्रवास और उनके कार्यकाल से जुड़े दस्तावेज, रिकॉर्ड और हस्ताक्षरयुक्त अभिलेख उपलब्ध कराने की अपील की है। इन अभिलेखों को झारखंड हाईकोर्ट के प्रस्तावित संग्रहालय में संरक्षित किया जाएगा। इससे रामगढ़ का वह ऐतिहासिक अध्याय फिर सुर्खियों में है, जिसे लंबे समय तक बहुत कम लोग जानते थे।
जब इतिहास की खोज बनी प्रशासन की प्राथमिकता
कुछ दिन पहले दैनिक स्टेट ने ऐतिहासिक पुस्तकों, ब्रिटिशकालीन अभिलेखों और उपलब्ध शोध सामग्री के आधार पर विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित की थी कि भारतीय पुनर्जागरण के अग्रदूत राजा राममोहन राय का 1805-1806 के दौरान रामगढ़ से महत्वपूर्ण संबंध रहा था। रिपोर्ट में उनके दीवान/शेरिस्तेदार के रूप में कार्य, जॉन डिग्बी के साथ प्रशासनिक सफर और रामगढ़ से शुरू हुई वैचारिक यात्रा का विस्तार से उल्लेख किया गया था।
अब जिला प्रशासन ने भी सार्वजनिक अपील जारी कर स्पष्ट किया है कि राजा राममोहन राय के उस दौर से जुड़े दस्तावेज ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और शोध की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
डीसी ऋतुराज की पहल, जनता से मांगे गए 220 साल पुराने सबूत
उपायुक्त ऋतुराज के नेतृत्व में जारी अपील में कहा गया है कि यदि किसी व्यक्ति, परिवार, संस्था या संग्रहकर्ता के पास राजा राममोहन राय के हस्ताक्षरयुक्त दस्तावेज, उनके दीवान कार्यकाल से जुड़े रिकॉर्ड अथवा अन्य ऐतिहासिक अभिलेख उपलब्ध हों तो उनकी जानकारी जिला प्रशासन को दी जाए।
जिला प्रशासन ने यह भी घोषणा की है कि उपयोगी दस्तावेज उपलब्ध कराने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं को सम्मानित किया जाएगा। यह पहल केवल रिकॉर्ड जुटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि रामगढ़ की ऐतिहासिक विरासत को राष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
हाईकोर्ट के संग्रहालय तक पहुंचेगा रामगढ़ का इतिहास
जिला प्रशासन ने बताया है कि यह पहल झारखंड उच्च न्यायालय की उस योजना से जुड़ी है, जिसके तहत न्यायालय के संग्रहालय में राजा राममोहन राय से जुड़े ऐतिहासिक अभिलेखों को सुरक्षित रखा जाएगा। इन दस्तावेजों का उपयोग शिक्षा, शोध और विरासत संरक्षण के उद्देश्य से किया जाएगा।
यदि रामगढ़ और चतरा क्षेत्र से जुड़े मूल दस्तावेज मिलते हैं तो वे न केवल स्थानीय इतिहास बल्कि भारतीय पुनर्जागरण के अध्ययन के लिए भी अमूल्य स्रोत सिद्ध होंगे। इससे रामगढ़ का नाम आधुनिक भारत के इतिहास में और अधिक प्रमुखता से दर्ज हो सकता है।
इतिहास के पन्नों से निकलकर वर्तमान में लौटी रामगढ़ की विरासत
राजा राममोहन राय को आज देश आधुनिक भारत के महान समाज सुधारक के रूप में याद करता है, लेकिन उनके जीवन का प्रारंभिक प्रशासनिक अध्याय रामगढ़ से जुड़ा रहा। यहीं के अनुभवों ने आगे चलकर उनके व्यक्तित्व को नई दिशा दी, जिसके बाद उन्होंने आत्मीय सभा, वेदांत ग्रंथों का प्रकाशन, सती प्रथा उन्मूलन और सामाजिक सुधारों का व्यापक अभियान शुरू किया।
आज जिला प्रशासन की पहल ने यह संदेश दिया है कि इतिहास केवल किताबों में पढ़ने की चीज नहीं, बल्कि उसे खोजकर, सहेजकर और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना भी समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। यदि यह अभियान सफल होता है तो रामगढ़ केवल औद्योगिक जिला ही नहीं, बल्कि भारतीय पुनर्जागरण की एक महत्वपूर्ण कर्मभूमि के रूप में भी नई पहचान हासिल करेगा।
(अस्वीकरण: यह समाचार जिला प्रशासन, रामगढ़ की प्रेस विज्ञप्ति तथा पूर्व में प्रकाशित ऐतिहासिक स्रोतों, अभिलेखों और शोध सामग्री पर आधारित है। विभिन्न ऐतिहासिक स्रोतों में कुछ तथ्यों एवं पदनामों के विवरण में अंतर मिल सकता है।)

