‘खाकी’ का मीडिया अवतार: गोला में बालू तस्करों से वसूली 50 हजार ‘!
गोला के बालू घाटों पर इन दिनों एक अजीबोगरीब ‘जादुई’ खेल चल रहा है। यहाँ खाकी ‘संपादक’ की भूमिका में नजर आ रहे हैं। मामला बड़ा दिलचस्प है—सूत्र बताते है कि एक वर्दीधारी ने बालू तस्करों के बीच यह खौफ फैला दिया कि मीडिया वाले उनके पीछे पड़े हैं और इस ‘आफत’ को टालने के लिए 50,000 रुपये का ‘प्रसाद’ चढ़ाना होगा। बेचारे डरपोक तस्कर, जो अवैध बालू से चांदी काट रहे थे, खाकी के इस नए ‘मीडिया प्रेम’ के झांसे में आ गए और चुपचाप मोटी रकम थमा दी। मजे की बात तो यह है कि असली मीडिया को इस वसूली की भनक तक नहीं लगी। 15 दिनों तक इस कारनामे की भनक किसी को नहीं लगी लेकिन कहते हैं न कि ‘चोरी और सीनाजोरी’ ज्यादा दिन नहीं चलती। भंडाफोड़ तब हुआ जब एक तस्कर ने चौराहे पर इस ‘डीलिंग’ का गुणगान कर दिया। उसके बाद से वसूली भाई सफाई देते फिर रहे हैं यह घटना साबित करती है कि गोला में अवैध बालू का धंधा इतना फल-फूल रहा है कि यहाँ वर्दी ही अब मीडिया का मुखौटा पहनकर वसूली का नया ‘मैनेजमेंट’ कर रही है।
गोला में ‘बालू के खेल’ में बड़ा फर्जीवाड़ा गोला क्षेत्र में अवैध बालू तस्करी का सिंडिकेट इतना मजबूत है कि वसूली के नए-नए कीर्तिमान रच रहे हैं। 5 से 10 अप्रैल के बीच गोला के विभिन्न बालू घाटों पर जो खेल हुआ, उसने कई एक की साख पर बट्टा लगा दिया है। मीडिया के नाम पर 50,000 रुपये से अधिक की उगाही चौक चौराहे पर चर्चा का विषय बना हुआ है
यह सिर्फ एक वसूली का मामला नहीं है, बल्कि गोला में चल रहे अवैध बालू साम्राज्य की पोल खोलता है। सैकड़ों ट्रैक्टर रोजाना घाटों से बालू निकालकर खपाए जा रहे हैं और स्थानीय स्तर पर ‘मैनेजमेंट’ के नाम पर लाखों का लेनदेन हो रहा है। जब असली मीडिया कर्मियों को इस बात की जानकारी हुई कि उनके नाम पर भी दुकान चला रहा है, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। अब सवाल यह उठता है की क्या बालू की तरह इस मामले को भी रेत में दबा दिया जाएगा?

