🟥 10 साल बाद लौटा खोया बेटा: पलामू पुलिस ने पिता के इंतज़ार को दिया जवाब
दस साल तक एक पिता की आंखें अपने बेटे की राह देखती रहीं। हर दरवाजे की आहट पर दिल धड़कता था और हर अनजान चेहरे में बेटे की झलक तलाशती निगाहें थक चुकी थीं। यह मार्मिक कहानी है पलामू जिले के छतरपुर थाना क्षेत्र के काला पहाड़ गांव की, जहां मंगल परहिया का बेटा मंदीस परहिया करीब दस वर्ष पहले काम की तलाश में घर से निकला था और फिर कभी लौटकर नहीं आया। समय गुजरता गया, रिश्तेदारों से पूछताछ हुई, परिचितों से संपर्क किया गया, लेकिन मंदीस का कोई सुराग नहीं मिला। न कोई फोन, न कोई खबर — सिर्फ यादें और उम्मीद बची थी। 18 फरवरी को टूट चुके पिता मंगल परहिया ने एक बार फिर हिम्मत जुटाकर छतरपुर थाना पहुंचकर बेटे को खोजने की गुहार लगाई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पलामू पुलिस अधीक्षक रिष्मा रमेशन ने तत्काल संज्ञान लिया और एसडीपीओ छतरपुर के नेतृत्व में विशेष टीम (SIT) का गठन किया गया। टीम को निर्देश मिला कि युवक को हर हाल में सकुशल खोजा जाए। पुलिस टीम पश्चिम बंगाल के साउथ 24 परगना जिले तक पहुंची और कोलकाता–बांग्लादेश बॉर्डर क्षेत्र में लगातार प्रयासों के बाद आखिरकार दस साल से लापता मंदीस परहिया को खोज निकाला गया।
जब पुलिस मंदीस को लेकर गांव पहुंची, तो काला पहाड़ में खुशी की लहर दौड़ गई। दस वर्षों का इंतजार एक पल में आंसुओं में बदल गया।
🟥 उम्मीद की जीत: पलामू पुलिस ने 10 साल से बिछड़े बेटे को पिता से मिलवाया
कहते हैं उम्मीद कभी मरती नहीं — और पलामू जिले के काला पहाड़ गांव की यह कहानी उसी का उदाहरण है। मंगल परहिया का बेटा मंदीस परहिया करीब दस साल पहले रोज़गार की तलाश में घर से निकला था। परिवार को लगा था कि कुछ महीनों में लौट आएगा, लेकिन महीनों का इंतजार सालों में बदल गया।दस वर्षों तक पिता ने दर-दर भटककर बेटे की तलाश की। रिश्तेदारों, जान-पहचान वालों और दूर-दराज के इलाकों में खोजबीन की गई, मगर कोई सुराग नहीं मिला। आखिरकार 18 फरवरी को पिता ने छतरपुर थाना पहुंचकर पुलिस से मदद की गुहार लगाई।पलामू एसपी रिष्मा रमेशन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए विशेष टीम का गठन किया और युवक को सकुशल ढूंढ लाने के निर्देश दिए। पुलिस टीम पश्चिम बंगाल के साउथ 24 परगना जिले तक पहुंची और स्थानीय इनपुट के आधार पर कोलकाता–बांग्लादेश बॉर्डर क्षेत्र में तलाश तेज की। कई दिनों की मेहनत के बाद पुलिस को सफलता मिली और मंदीस परहिया को सकुशल बरामद कर लिया गया।जब बेटे को गांव लाया गया तो पिता मंगल परहिया की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। यह सिर्फ एक युवक की बरामदगी नहीं थी, बल्कि एक पिता की दस साल की पीड़ा का अंत था। पूरे परिवार ने पलामू पुलिस का आभार जताया। यह कहानी भरोसे की जीत और उम्मीद की ताकत को साबित करती है।
Missing Son Found After 10 Years: Palamu Police Reunite Father and Son
After a decade of painful waiting, a father in Jharkhand finally embraced his lost son, thanks to the efforts of the Palamu Police. Mandis Parahiya had left his home in Chhatarpur area nearly ten years ago in search of work and never returned. With no phone calls or information, his family lived only with memories and hope.
On February 18, his father, Mangal Parahiya, once again approached the local police station seeking help. Taking the matter seriously, senior officers formed a special team and ordered an immediate search. Acting on technical inputs and local intelligence, the team traced Mandis to South 24 Parganas district of West Bengal, near the Kolkata–Bangladesh border.After sustained efforts, police located him safe and brought him back home. The emotional reunion moved the entire village, as years of sorrow turned into tears of joy. The family thanked the police for their dedication, calling it not just a recovery, but a victory of hope and determination.

