🟥 NH-33: जहां हेडलाइट नहीं, इशारे बोलते हैं
रामगढ़ में अब रात सिर्फ अंधेरे की नहीं, साजिशों की गवाह बन चुकी है। NH-33, रांची–पटना मुख्य मार्ग—वही सड़क जहां गाड़ियों की रफ्तार के साथ-साथ सूचनाओं का ट्रैफिक भी उतना ही तेज़ होता है सूत्रों के मुताबिक, डोडा लदी गाड़ियों के रूट, नंबर और टाइमिंग पहले से तय रहते हैं। यह महज़ अफवाह नहीं, बल्कि ऐसा सवाल बन चुके है, जिसके जवाब अब तक सिस्टम नहीं दे पाया है। फुसफुसाहटें कहती हैं—
“यहां गाड़ी नहीं चलती, गाड़ी चलाई जाती है।”
🟥 ‘नशे के कारोबारी’ बनाम ‘नशे के शिकारी’: असली खेल यहीं से शुरू
सूत्र बताते हैं कि रामगढ़ जिले में डोडा से जुड़ी हर हलचल की सबसे पुख्ता जानकारी कथित रिकवरी गैंग और सीजर गैंग से जुड़े लोगों के पास होती है। जैसे ही खूंटी से नशे का जखीरा निकलता है— जिले के कथित “रोड के किंग” एक्टिव हो जाते हैं अलग–अलग गाड़ियों में गैंग सीमाओं पर तैनात हो जाती है तय जगह, तय समय, तय शिकार और फिर होता है आमना–सामना—डील बनी → सब सेट , डील टूटी → वही गाड़ी पुलिस के हवालेयानी, “या तो हिस्सा दो, या सिस्टम को सौंप दिए जाओ।”
🟥 मोबाइल नेटवर्क से चलता है नशे का नेटवर्क
बताया जाता है कि बिना इंट्री की डोडा लदी गाड़ियां जैसे ही खूंटी से हजारीबाग की ओर बढ़ती हैं— उनकी पूरी कुंडली पहले से तैयार रहती है रांची से ही गुर्गे बाज़ की तरह पीछा करने लगते हैं मोबाइल फोन हर पल अपडेट देता है कब चली कहां रुकी अगला मोड़ कौन सा यहां न रिश्ता काम आता है, न कानून—सबसे बड़ा है रुपैया। हैरानी की बात यह कि इतना बड़ा नेटवर्क कथित तौर पर वरीय अधिकारियों की नजरों से दूर चलता रहा।
🟥 मांडू क्यों बना नशे की जंग का सबसे सुरक्षित अड्डा?
इलाके में चर्चा है कि जैसे ही डोडा लदी गाड़ियां रामगढ़ थाना क्षेत्र पार करती हैं— सूचना सीधे कुज्जू पहुंच जाती है। इसके बाद मांडू क्षेत्र में बैठे “बाज़ और चील” हाई अलर्ट मोड में आ जाते हैं। कथित सुरक्षित प्वाइंट: हेसागढ़ा , मांडू फॉरेस्ट ऑफिस के आसपास
मणिपाल स्कूल ,मांडू डीह ,यहां गाड़ियां रोकी जाती हैं… और कानून तमाशबीन बना रह जाता है।
⚠️ बड़ा सवाल
यदि सूत्रों के अनुसार यह सब सच है— तो इतने बड़े नेटवर्क पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं? एक ही पैटर्न बार–बार क्यों दोहराया जा रहा है? और सबसे अहम—कौन दे रहा है वरदहस्त? हालांकि, इस पूरे मामले में अब तक किसी भी स्तर पर आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन घटनाओं की समानता किसी संगठित सिंडिकेट की ओर इशारा जरूर करती है।
🟡 अगले अंक में खुलासा:
सिंडिकेट के सभी सदस्यों के नाम
खूंटी से रामगढ़ तक पूरा कनेक्शन
कौन है गैंग का मास्टरमाइंड?
📌 यह रिपोर्ट पूरी तरह सूत्रों पर आधारित है।