कफ सिरप कांड में एक और मौत: नागपुर AIIMS में 3 महीने तक जिंदगी के लिए लड़ा हर्ष, अंत में हार गया जंग; परिवार में मचा कोहराम
बैतूल: मध्य प्रदेश में जहरीले कफ सिरप से 26 बच्चों की मौत का मामला भले ही अब ठंडा पड़ गया हो लेकिन पीड़ित परिजनों के जख्म अभी भी हरे हैं. बैतूल के आमला में एक और बच्ची की मौत हो गई. बैतूल जिले में कफ सिरप से ये तीसरी मौत है. जबकि 23 मौतें छिंदवाड़ा के परासिया क्षेत्र में हुई थीं,
बालक का नागपुर एम्स में इलाज चल रहा था
आमला ब्लॉक के टीकाबर्री गांव निवासी हर्ष यदुवंशी की नागपुर एम्स में इलाज के दौरान मौत हो गई. हर्ष बीते 3 माह से से जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहा था, लेकिन आखिरकार वह हार गया. बैतूल के हर्ष यदुवंशी को भी परासिया निवासी डॉ.एस.एस. ठाकुर ने कोल्ड्रिफ कफ सिरप लिखा था. परिजनों का आरोप है कि सिरप से बच्चों की मौत की जानकारी सामने आने के बावजूद डॉक्टर ने यह दवा दी.
नागपुर एम्स में बच्चे का पोस्टमार्टम
हर्ष का इलाज नागपुर एम्स में चल रहा था, जहां मध्य प्रदेश सरकार की ओर से भी इलाज की व्यवस्था की गई. इसके बावजूद परिजनों ने अपने स्तर पर भी इलाज में मोटी रकम खर्च की. कफ सिरप से प्रभावित बच्चों में हर्ष सबसे लंबे समय तक जीवन के लिए संघर्ष करता रहा. जिला प्रशासन ने हर्ष की मौत की आधिकारिक पुष्टि की है. नागपुर एम्स में ही हर्ष का पोस्टमार्टम कराया गया, जिसकी रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है.
एसडीएम ने बालक की मौत की पुष्टि की
इससे पहले भी हर्ष के परिजनों ने संबंधित डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई को लेकर शिकायत दर्ज कराई थी. इस मामले में आमला एसडीएम शैलेन्द्र बड़ोनिया ने बताया “दुखद है कि हर्ष की मौत हो गई है. ये मामला भी कोल्ड्रिफ कप सिरप कांड से जुड़ा है. शासन स्तर पर इसकी जानकारी हैं. मध्य प्रदेश सरकार द्वारा उसका उपचार कराया गया. प्रशासन द्वारा आगे की कार्रवाई की जा रही है.”
पीड़ित परिजनों में भारी आक्रोश
वहीं, पीड़ित परिजनों ने बच्चे की मौत के लिए जिम्मेदार डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है. 3 माह तक नागपुर में इलाज कराने से परिजनों को गहने तक बेचने पड़े. मोटी रकम खर्च होने के बाद भी बच्चे की मौत के दंश से परिजन टूट गए हैं.