Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
UP Police Constable Exam 2026: यूपी पुलिस कांस्टेबल लिखित परीक्षा का शेड्यूल जारी, 3 दिनों तक चलेगा ... Uttarakhand Madarsa Board: उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड खत्म! अब 'अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण' तय करेगा... Bikram Majithia News: जेल से बाहर आते ही गुरुद्वारा दुख निवारण साहिब पहुंचे मजीठिया, नतमस्तक होकर पर... Batala Murder Case: बटाला कत्ल मामले में पुलिस की बड़ी कामयाबी, हत्या की साजिश रचने वाला 'कपल' गिरफ्... Punjab Highway Accident: पंजाब में हाईवे पर स्कॉर्पियो का भीषण हादसा, 3 पुलिसकर्मियों समेत 6 लोग गंभ... Punjab Board Exam Update: कब शुरू होंगी PSEB 12वीं की परीक्षाएं? डेटशीट को लेकर आई बड़ी जानकारी, छात... Horrific Attack: घर से निकलते ही 13 साल के बच्चे पर खूंखार कुत्ते का हमला, लहूलुहान हुआ मासूम; चीखें... Punjab Governor Visit: पंजाब के 3 अहम जिलों के दौरे पर रहेंगे गवर्नर, प्रशासन ने कसी कमर; सुरक्षा के... Jalandhar Raid: जालंधर में शराब माफिया के ठिकाने पर बड़ी रेड, भारी पुलिस फोर्स ने घंटों खंगाला घर; इ... Crime Strike: बड़े शातिर चोर गिरोह का पर्दाफाश, पुलिस ने 6 आरोपियों को दबोचा; लाखों का माल बरामद

लिव-इन रिलेशनशिप पर मोहन भागवत का विचार, बयान बना चर्चा का विषय

पश्चिम बंगाल के कोलकाता में एक RSS कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने भारतीय समाज में परिवार की संरचना बनाए रखने के महत्व पर चर्चा की. उन्होंने कहा कि लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले लोग जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार नहीं हैं. RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि लिव-इन रिलेशनशिप के कॉन्सेप्ट सभी के सामने है. इसमे आप जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार नहीं हैं. यह सही नहीं है. उन्होंने कहा कि परिवार, शादी, सिर्फ़ शारीरिक संतुष्टि का ज़रिया नहीं है. यह समाज की एक इकाई है. परिवार ही वह जगह है जहां एक व्यक्ति समाज में रहना सीखता है. लोगों के मूल्य वहीं से आते हैं.

मोहन भागवत ने कहा कि परिवार एक संस्कृति और अर्थव्यवस्था का संगम है. ये कुछ मूल्यों को अपनाकर समाज को आकार देता है. उन्होंने कहा कि हमारी आर्थिक गतिविधि भी परिवार के ज़रिए होती है. देश की बचत परिवारों में होती है. सोना परिवारों में होता है. सांस्कृतिक इकाई, आर्थिक इकाई, सामाजिक इकाई सब परिवार है. उन्होंने कहा कि आप संन्यासी बन सकते हैं, शादी न करें, ठीक है. लेकिन शादी न करना और परिवार को भी बनाए रखना, ऐसा नहीं हो सकता.

बच्चों के सवाल पर क्या बोले आरएसएस प्रमुख?

परिवार को बनाए रखने के मुद्दे पर, आरएसएस प्रमुख ने कहा कि हालांकि बच्चों की संख्या तय करने या शादी की उम्र तय करने का कोई फॉर्मूला नहीं है. लेकिन, रिसर्च से पता चलता है कि तीन बच्चे आदर्श हो सकते हैं और शादी 19 से 25 साल की उम्र में की जा सकती है.

उन्होंने कहा कि कितने बच्चे होने चाहिए, यह परिवार में तय होता है, पति और पत्नी और समाज इसका कोई फ़ॉर्मूला नहीं दिया जा सकता. मैंने डॉक्टरों वगैरह से बात करके कुछ जानकारी हासिल की है और वे कहते हैं कि अगर शादी जल्दी हो खासतौर पर 19-25 साल की उम्र के बीच और तीन बच्चे हों तो माता-पिता और बच्चों की सेहत अच्छी रहती है.उन्होंने कहा कि मनोवैज्ञानिक कहते हैं कि तीन बच्चे होने से लोग ईगो मैनेजमेंट सीखते हैं.

जनसंख्या को प्रभावी ढंग से मैनेज करने की जरूरत

जनसंख्या और डेमोग्राफिक बदलाव पर चर्चा करते हुए मोहन भागवत ने दावा किया कि भारतीय जनसंख्या को ‘प्रभावी ढंग से मैनेज नहीं किया गया है.’ उन्होंने कहा कि हमने जनसंख्या को प्रभावी ढंग से मैनेज नहीं किया है. जनसंख्या एक बोझ है, लेकिन यह एक संपत्ति भी है. हमें अपने देश के पर्यावरण, इंफ्रास्ट्रक्चर, सुविधाओं, महिलाओं की स्थिति, उनके स्वास्थ्य और देश की ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए 50 साल के अनुमान के आधार पर एक पॉलिसी बनानी चाहिए.